प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर रोजमार्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियों पर भी दिख रहा है। कई एफएमसीजी कंपनियां कीमतों में वृद्धि का फैसला करने से पहले कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रख रही हैं। हालांकि कुछ फर्में अपने उत्पादों के दाम एक अंक में बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र की कंपनियों ने ग्राहकों पर मूल्य वृद्धि का भार डालना शुरू कर दिया है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष और कच्चे माल की कमी की बढ़ती आशंका के कारण प्लास्टिक जैसे कच्चे तेल से प्राप्त उत्पादों और पाम तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
एक कंपनी के कार्याधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि निकट भविष्य में 3 से 4 फीसदी मूल्य वृद्धि की आशंका है। उन्होंने कहा, ‘यदि संघर्ष एक महीने और जारी रहा तो कच्चे माल और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर मूल्य वृद्धि का एक और दौर शुरू हो सकता है। पारले प्रोडक्ट्स ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने से पहले स्थिति पर कड़ी नजर रखने की बात कही है।
पारले प्रोडक्ट्स के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने बताया, ‘हमने बातचीत का कच्चे तेल की कीमतों पर प्रभाव देखा है और ग्राहकों के लिए किसी भी मूल्य वृद्धि करने से पहले हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि स्थिति जल्द सुलझ जाएगी।’
लाहौरी जीरा बनाने वाली चंडीगढ़ की आर्चियन फूड्स ने कहा कि रेजिन की कीमतों में वृद्धि कंपनी को वितरकों के लिए कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती है। कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ सौरभ मुंजाल ने कहा, ‘अगले सप्ताह तक स्थिति सामान्य नहीं हुई तो मार्जिन बचाने के लिए हमें वितरक के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।’
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ा है इसलिए इस क्षेत्र में उत्पादों के दाम बढ़ रहे हैं। गोदरेज एंटरप्राइजेज समूह के अप्लायंसेज कारोबार के कारोबार प्रमुख और कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, ‘डिजाइन और मॉडल में उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के आधार पर कीमतों में 7 से 10 फीसदी की वृद्धि होगी।’ ब्लूस्टार और हायर जैसी कंपनियों ने भी अपने एसी की कीमतों में 15फीसदी तक की वृद्धि की है।