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इंडिगो एयरलाइन ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 2,536.9 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध घाटा दर्ज किया। यह घाटा विदेशी मुद्रा में भारी नुकसान, विमानन ईंधन (एटीएफ) की बढ़ी हुई कीमतों और पश्चिम एशिया की लड़ाई के कारण उड़ानें रद्द होने से हुआ। एयरलाइन ने पिछले साल की इसी अवधि में 3,067.5 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
इंडिगो ने बताया कि चौथी तिमाही के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 5 प्रतिशत तक तेजी से कमजोर हुआ। इस कारण उसे लगभग 4,820 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा घाटा हुआ। इंडिगो के मुख्य वित्तीय अधिकारी गौरव नेगी ने एनालिस्ट कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान कहा, ‘विदेशी मुद्रा घाटा मुख्य रूप से ‘मार्क-टू-मार्केट’ नुकसान है।’ उन्होंने बताया कि यह विदेशी मुद्रा घाटा मुख्य रूप से विमानों की लीज और रखरखाव से जुड़ी उन देनदारियों से संबंधित है, जिनका भुगतान 8-10 साल में किया जाना है।
नेगी ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण एयरलाइन को परिचालन, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करनी पड़ी। उन्होंने कहा, ‘हमारी रोजाना लगभग 160 उड़ानें थीं, जो पश्चिम एशिया और यूरोप तक जाती थीं। जब संकट आया, तो इनमें से ज्यादातर उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।’
नेगी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विमानन ईंधन की बेंचमार्क कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। सरकार और तेल विपणन कंपनियों के सहयोग के कारण घरेलू एटीएफ की कीमतों में लगभग 25-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, वहीं इंडिगो ने कहा कि वह ईंधन की लागत में हुई इस बढ़ोतरी का पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं डाल सकी।
चौथी तिमाही में, इंडिगो का कुल खर्च सालाना आधार पर 30.1 प्रतिशत बढ़कर 25,932.5 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उसकी कुल आय सालाना आधार पर केवल 3.2 प्रतिशत बढ़कर 23,830.7 करोड़ रुपये रही।