प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
देश की राइड-हेलिंग, ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियां लॉजिस्टिक और डिलिवरी की लागत बढ़ने के मद्देनजर कमर कस रही हैं। इसकी वजह शुक्रवार को सरकार द्वारा संचालित तेल की खुदरा विक्रता कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये तक का इजाफा करना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल आने के कारण यह बढ़ोतरी की गई है। सीएनजी के दाम भी प्रति किलोग्राम 2 रुपये तक बढ़ाए गए हैं।
उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में लंबे समय तक की बढ़ोतरी करने से परिचालन लागत बढ़ सकती है तथा परिवहन, डिलिवरी और ऑनलाइन सामान की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, ‘इसका सीधा असर बाइक-टैक्सी और डिलिवरी पार्टनरों पर पड़ेगा, जिनके ज्यादातर वाहन पेट्रोल से चलते हैं।’
अगर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो किराया 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस बढ़ोतरी का कम से कम कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाला जा सकता है।’ उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन राइड-हेलिंग और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए लंबे समय से विकल्प बने हुए हैं। लेकिन तेजी से उन्हें अपनाना मुश्किल है क्योंकि उद्योग में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर बाइक अभी भी पेट्रोल से चलती हैं।
उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि तुरंत दबाव जल्द ही तैयार भोजन, किराने के सामान और पैकेट बंद खाने जैसी श्रेणियों में महसूस होने की आशंका है, जहां ईंधन की ज्यादा लागत सीधे तौर पर सामान मंगाने और डिलिवरी के खर्च पर असर डालती है।
उद्योग के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘क्विक कॉमर्स में ताजा भोजन और किराने के सामान वाली श्रेणियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है, जिससे आखिरकार कीमतें बढ़ सकती हैं।’