पिछले हफ्ते फार्मा सेक्टर में कई अहम खबरें सामने आईं। कहीं नई दवाओं के ट्रायल की जानकारी आई, तो कहीं जेनेरिक दवाएं लॉन्च हुईं। कुछ कंपनियों ने बड़ी डील भी की और नियमों से जुड़े कुछ बदलाव भी देखने को मिले। एमके ब्रोकरेज की फार्मा वीकली रिपोर्ट के मुताबिक इन घटनाओं का असर भारत के साथ-साथ दुनिया की कई दवा कंपनियों पर पड़ सकता है।
दुनिया भर में मोटापा से जुड़ी दवाओं को लेकर कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार Zealand Pharma और Roche की मोटापा से जुड़ी दवा के ट्रायल में मरीजों का वजन करीब 10.7 प्रतिशत तक कम हुआ। हालांकि नतीजे बाजार की उम्मीदों से थोड़े कम रहे। इसी बीच Pfizer ने भी चीन के मोटापा दवा बाजार में कदम रख दिया है।
जेनेरिक दवाओं के बाजार में भी हलचल तेज है। Aspen Pharmacare कनाडा में सेमाग्लूटाइड के जेनेरिक वर्जन के लिए मंजूरी लेने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि कनाडा को दूसरे देशों में लॉन्च के लिए रेफरेंस मार्केट बनाया जा सकता है। वहीं Aurobindo Pharma और Natco Pharma ने अमेरिका में कैंसर की दवा Pomalyst के जेनेरिक वर्जन को लॉन्च किया है।
भारतीय कंपनियां भी नए कदम उठा रही हैं। Alembic Pharma ने अमेरिका में मूत्र संक्रमण (UTI) के इलाज की दवा Pivya की पहली बिक्री शुरू की है। यह कंपनी का अमेरिका में पहला ब्रांडेड उत्पाद है। इसके अलावा Emcure Pharma ने Roche के साथ समझौता किया है, जिसके तहत वह भारत में Roche की किडनी और ट्रांसप्लांट से जुड़ी दवाओं की मार्केटिंग करेगी। वहीं Glenmark Pharma भारत में सेमाग्लूटाइड के जेनेरिक वर्जन को लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिसकी कीमत मूल दवा से काफी कम हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर भी कई बड़े फैसले सामने आए हैं। Sanofi ने ब्राजील में अपने जेनेरिक बिजनेस Medley को स्थानीय कंपनी EMS को 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा में बेचने पर सहमति जताई है। इसी तरह Lonza ने अपने कैप्सूल और हेल्थ इंग्रीडिएंट्स बिजनेस को Lone Star Funds को बेचने का फैसला किया है, हालांकि कंपनी इसमें 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेगी।
दवा उद्योग में रेगुलेटरी स्तर पर भी कई बदलाव हुए हैं। USFDA ने दवा कंपनियों के लिए नया ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी किया है, इसमें बताया गया है कि जांच के दौरान अगर कोई कमी या आपत्ति मिलती है तो कंपनियों को उसका जवाब कैसे देना चाहिए। वहीं भारत में भी क्लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत अगर किसी दवा का ट्रायल कई जगहों पर हो रहा है, तो उसके लिए सिर्फ एक एथिक्स कमेटी की मंजूरी ही काफी हो सकती है।
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रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर दवा निर्यात पर भी पड़ सकता है। फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि सप्लाई और शिपिंग में दिक्कत आने से भारतीय फार्मा उद्योग को करीब 250 से 500 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
इस दौरान USFDA ने कुछ भारतीय दवा कंपनियों के प्लांट्स का निरीक्षण भी किया। डॉ. रेड्डीज को अपने श्रीकाकुलम प्लांट के लिए निरीक्षण रिपोर्ट मिल गई है। वहीं लूपिन के अंकलेश्वर प्लांट की जांच के बाद दो आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके अलावा लॉरस, ग्लेनमार्क, ऑरोबिंदो और ज़ायडस जैसी कंपनियों की कुछ जेनेरिक दवाओं को भी USFDA से मंजूरी मिली है। रिपोर्ट में कुछ दवा कंपनियों में मैनेजमेंट से जुड़े बदलावों का भी जिक्र किया गया है। ग्लैंड फार्मा के सीईओ ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं जीएसके फार्मा ने नए सीएफओ की नियुक्ति की घोषणा की है।