प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्र सरकार अब वजन घटाने वाली दवाओं के गलत प्रचार और बिना अनुमति बिक्री पर नियामकीय सख्ती करने जा रही है। खासतौर पर सेमाग्लूटाइड आधारित वजन घटाने वाली दवाओं को लेकर निगरानी बढ़ाई जाएगी। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब भारत में इस दवा का पेटेंट खत्म होते ही दवा कंपनियों ने दो ही दिनों में ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड (जीएलपी-1) के 15 से ज्यादा जेनेरिक संस्करण लॉन्च कर दिए।
इस वजह से जीएलपी-1 दवाओं की कीमत में भारी गिरावट आई है और इन दवाओं के दाम अब मूल दवाओं, ओजेम्पिक और वीगॉवी की तुलना में 50 से 70 प्रतिशत तक सस्ते हो गए हैं जिन्हें डेनमार्क की कंपनी नोवो नॉर्डिस्क बेचती है। जीएलपी-1 शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं, भूख कम करती हैं और पेट भरने का अहसास कराती हैं साथ ही पेट के खाली होने की प्रक्रिया धीमी करती है। इससे वजन कम करने में मदद मिलती है और टाइप-2 डायबिटीज व मोटापे के मरीजों में शुगर नियंत्रण बेहतर होता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है, ‘हाल ही में भारत में जीएलपी-1 आधारित वजन घटाने वाली दवाओं के कई सस्ते जेनेरिक विकल्प बाजार में आने के बाद चिंता बढ़ गई है कि ये दवाएं अब मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन मंच, थोक विक्रेताओं और वेलनेस क्लीनिक के जरिये मांग के आधार पर किस तरह उपलब्ध होंगी।’ मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर इन दवाओं का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह और निगरानी के किया गया तोइससे गंभीर उलटे प्रभाव दिख सकते हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जोखिम की स्थिति बन सकती है।