नॉर्वे की एनर्जी रिसर्च फर्म रायस्टैड एनर्जी का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई से खाड़ी की 20 लाख बैरल प्रति दिन तक की रिफाइनिंग क्षमता खतरे में पड़ गई है। भारत रसोई गैस (एलपीजी) की अपनी कुल खपत का 65 प्रतिशत आयात करता है। इसमें से 80 प्रतिशत आयात कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से होता है। यह जहाज होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरते हैं। भूराजनीतिक तनाव भारत की आपूर्ति को बहुत संवेदनशील बना देती है।
रायस्टैड एनर्जी ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है। ऐसे में खाड़ी देशों के तेल का भंडार अधिकतम स्तर पर पहुंच गया है। इससे इन इलाकों के तेलशोधकों के सामने गंभीर चुनौती आ रही है। तेलशोधकों को परिचालन रोकने को मजबूर होना पड़ सकता है। निर्यात रुकने पर क्षमता घटानी होगी और उत्पादन सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित रह जाएगी।’
इसमें यह भी कहा गया है कि अभी बहरीन और कुवैत को सबसे ज्यादा परिचालन जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके निर्यात पर निर्भर तेल शोधन संयंत्रों के पास कोई विकल्प नहीं है। रायस्टैड एनर्जी में कमोडिटी मार्केट्स, ऑयल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पंकज श्रीवास्तव ने कहा, ‘अगर लड़ाई जारी रहती है तो पूरे इलाके में उत्पादन बंद करना पड़ सकता है और रिफाइनिंग में कटौती होने की पूरी संभावना है। अगर अगले 6 सप्ताह तक स्ट्रेट से तेल की आवाजाही शुरू नहीं हुई तो इससे 20 लाख बैरल प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति को खतरा हो सकता है।’