प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्र और दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि सोशल मीडिया कंपनी ‘एक्स’ भारत में सुरक्षित आश्रय प्रावधान के तहत सुरक्षा खो सकती है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि एक्स ने पत्रकार राणा अय्यूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई नहीं की है।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव के समक्ष प्रस्तुत एक नोट में पुलिस ने कहा कि एक्स को सितंबर और दिसंबर 2025 में नोटिस जारी कर उक्त पोस्ट हटाने का निर्देश दिया गया था। केंद्र ने कहा कि जनवरी 2025 में एक निचली अदालत ने इसी सामग्री को लेकर अय्यूब के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी निर्देश दिया था।
सरकार के अनुसार पुलिस के ये पत्र और निचली अदालत का निर्देश सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत ‘वास्तविक जानकारी’ के बराबर हैं जिससे एक्स पर गैर-कानूनी सामग्री के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का दायित्व बनता है। अपनी टिप्पणी में केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि ऐसी जानकारी होने के बावजूद एक्स द्वारा जवाब न देने से आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत प्राप्त सुरक्षा समाप्त हो जाती है।
केंद्र ने कहा,‘यह विचारणीय है कि इस प्रकार की निष्क्रियता लागू नियमों में निर्धारित उचित सावधानी संबंधी आवश्यकताओं का उल्लंघन है और इससे उपयोगकर्ता यानी राणा अय्यूब (प्रतिवादी संख्या 04) द्वारा गैर-कानूनी गतिविधियां जारी रखने को बढ़ावा मिलता है। इसे देखते हुए धारा 79(1) के तहत मध्यस्थ को प्राप्त सुरक्षित आश्रय का संरक्षण वापस लिया जा सकता है।’
आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 मध्यस्थों (सोशल मीडिया, आईएसपी, ई-कॉमर्स) को तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए उत्तरदायित्व से ‘सुरक्षित आश्रय’ सुरक्षा प्रदान करती है बशर्ते वे तटस्थ होकर कार्य करें, उचित सावधानी बरतें और अदालती आदेशों या सरकारी सूचनाएं प्राप्त होने पर गैर-कानूनी सामग्री हटा दें।