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गोल्ड लोन में दिखी राहत, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां तेजी से बदल रहीं पोर्टफोलियो

आरबीआई की ढील के बाद कंपनियां पोर्टफोलियो विविधीकरण में जुटीं

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अनुप्रेक्षा जैन   
Last Updated- March 13, 2026 | 9:39 AM IST

सूक्ष्म वित्त संस्थान बाहरी दबावों के कारण मुख्य तौर पर परिसंपत्ति गुणवत्ता संबंधी दबावों का सामना कर रहे हैं। लिहाजा ये संस्थान इन दबावों से निपटने के लिए सुरक्षित उत्पादों जैसे सोने और मॉर्टगेज पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह कदम भारतीय रिज़र्व बैंक के कुल परिसंपत्तियों के 60 प्रतिशत तक पात्रता मानदंड में ढील देने के बाद उठाया गया है।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के आंकड़े संकलित करने से पता चलता है कि क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण, सैटिन क्रेडिटकेयर, स्पंदना स्फूर्ति जैसे सूक्ष्म वित्त संस्थानों ने इस वर्ष अपने सूक्ष्म ऋणों में उल्लेखनीय कमी की है। ये ऋणदाता अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) ऋण, संपत्ति के बदले ऋण (एलएपी), किफायती आवास वित्त और वाहन ऋण जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

आरोहण फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार नाम्बियार ने कहा, ‘माइक्रोफाइनैंस संस्थाओं के लिए पात्रता मानदंड को 60 प्रतिशत तक कम करने का आरबीआई का नियम स्वागत योग्य है। इससे हमें पोर्टफोलियो विविधीकरण के दृष्टिकोण से सुरक्षित ऋण व्यवसाय स्थापित करने का अवसर मिलता है।’

नाम्बियार ने कहा, ‘हम सुरक्षित ऋण उत्पादों पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत स्वर्ण, गृह सुधार, वाहन और संपत्ति के बदले ऋण आदि पर विचार किया जा रहा है। अगले वित्तीय वर्ष में कम से कम एक उत्पाद लॉन्च किया जाएगा।’
उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि पात्रता मानदंड को कम करने जैसे नियामक परिवर्तनों के अलावा कई राज्यों का सामाजिक-राजनीतिक वातावरण भी विविधीकरण का प्रमुख कारण रहा है।

माइक्रोफाइनैंस ऋणदाता पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों में व्यापक रूप से कार्यरत हैं, जहां राज्य सरकारों ने माइक्रोफाइनैंस संस्थाओं को विनियमित करने और जबरन वसूली प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए हैं।

सैटिन क्रेडिटकेयर नेटवर्क के प्रबंध निदेशक एचपी सिंह ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के निवेशक सम्मेलन में कहा कि सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के परिपक्व होने के साथ विविधीकरण की प्रवृत्ति में तेजी आने की संभावना है। सिंह ने कहा, ‘सूक्ष्म वित्त संस्थानों के संचित स्वामित्व (एयूएम) में लगभग 10-15 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है जबकि सहायक कंपनियों (सैटिन हाउसिंग फाइनेंस और सैटिन फिनसर्व) में 40-50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वे इसी दर से बढ़ती रहेंगी। हम अपनी सहायक कंपनियों का काफी तेजी से विकास कर रहे हैं। इसलिए मुझे लगता है कि सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि दर हमारे लिए काफी सतर्क और अच्छी है।’

First Published : March 13, 2026 | 9:39 AM IST