कंपनियां

सुप्रीम कोर्ट से रिलायंस को बड़ी राहत: SEBI का ₹447 करोड़ का वसूली आदेश रद्द, वापस मिलेंगे ₹250 करोड़

सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के ट्रेडिंग मामले में रिलायंस के खिलाफ सेबी का 447 करोड़ रुपये का वसूली आदेश रद्द कर दिया, लेकिन 25 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा

Published by
भाविनी मिश्रा   
Last Updated- May 30, 2026 | 10:16 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें उसने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) को 2007 से लंबे चल रहे रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (आरपीएल) फ्यूचर्स ट्रेडिंग मामले में ब्याज सहित 447.27 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया गया था। 

हालांकि, आरआईएल पर लगाया गया 25 करोड़ रुपये का एक अलग जुर्माना अदालत ने बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि कंपनी पर धोखाधड़ी और बाजार में हेरफेर के आरोप सेबी (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार पर रोक) नियमन, 2003 के तहत सही साबित नहीं हो सके।

जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन के पीठ ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (सैट) के उस फैसले के खिलाफ आरआईएल की अपील को आंशिक रूप से मंजूर कर लिया, जिसमें सेबी के निष्कर्षों को सही ठहराया गया था। कोर्ट ने सैट के इस निष्कर्ष में खामी पाई कि आरआईएल ने आरपीएल फ्यूचर्स में ट्रेडिंग करते समय धोखाधड़ी वाला आचरण किया था। पीठ ने कहा, ‘हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि सैट ने अपने बहुमत के फैसले में निर्णय सुनाते समय बहुत बड़ी गलती की है। यह गलती पीएफयूटीपी रेग्युलेशंस के नियम 3 और 4 के तहत धोखाधड़ी के सवाल से जुड़ी है।’ 

धोखाधड़ी के निष्कर्ष को रद्द करते हुए, अदालत ने फैसला सुनाया कि अब जब्ती का आदेश लागू नहीं रह सकता। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने 250 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया, जिसे आरआईएल ने मुकदमे के दौरान जारी किए गए अंतरिम निर्देशों के तहत ‘निवेशक संरक्षण कोष’ में जमा किया था।

निर्णय में कहा गया, ‘हम निर्देश देते हैं कि अपीलकर्ता को न्यायालय के दिनांक 17-12-2020 के आदेश के अनुपालन में ‘निवेशक संरक्षण कोष’ में जमा की गई 250 करोड़ रुपये की राशि वापस की जाए।’ हालांकि, अदालत ने आरआईएल को पूरी राहत नहीं दी।

First Published : May 30, 2026 | 10:16 AM IST