प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत की खुदरा महंगाई अप्रैल में 80 आधार अंक बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई जबकि यह मार्च में 3.4 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी और व्यक्तिगत वस्तुओं में विशेषकर कीमती धातुओं के महंगा होने के कारण हुई है। यह पश्चिम एशिया संकट के बाद दूसरे पूरे महीने का आंकड़ा है। इस अवधि में वैश्विक ईंधन आपूर्ति को बाधित हुई और कीमतों में उछाल आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम महंगाई दर दर्शाती है कि ईंधन की कीमतों का सीधा असर उपभोक्ताओं पर सीमित रहा है। हालांकि वे ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण बढ़ती इनपुट लागतों और अल नीनो की आशंका के अप्रत्यक्ष दबाव की उम्मीद कर रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि दरअसल आयात अधिक हैं, इसलिए रुपये के अवमूल्यन से चांदी और सोने जैसी कीमती धातुओं की लागत और बढ़ गई है।
अप्रैल का यह आंकड़ा दुरुस्त किए गए 2024 उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला का चौथा महीना है और एनएसओ द्वारा जारी बैक सीरीज आंकड़े की तुलना में 13 महीने का उच्च स्तर होने का अनुमान है। पिछली बार मार्च 2025 में महंगाई अप्रैल के स्तर से अधिक थी, जब यह 3.56 प्रतिशत थी। भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खुदरा कीमतें बढ़ीं।
हालांकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (ग्रामीण) मार्च के 3.63 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 3.74 प्रतिशत हो गया। उधर इस अवधि में शहरी महंगाई 3.11 प्रतिशत से बढ़कर 3.16 प्रतिशत हो गई। यह आधार प्रभाव के सुस्त होने और चुनिंदा खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण हुई। इन वस्तुओं में नारियल (44.55 प्रतिशत), टमाटर (35.28 प्रतिशत) और फूलगोभी (25.58 प्रतिशत) शामिल हैं।
हालांकि अन्य उत्पाद जैसे हरी मिर्च (22.66 प्रतिशत), पत्तागोभी (22.13 प्रतिशत), अंगूर (22.12 प्रतिशत), किशमिश (23.97 प्रतिशत) और बैंगन (21.09 प्रतिशत) सहित अन्य वस्तुओं में भी महंगाई दर ऊंची रही। इसके विपरीत प्याज (-17.67 प्रतिशत), आलू (-23.69 प्रतिशत), लीची (-15.49 प्रतिशत), मटर (-6.36 प्रतिशत) जैसे कुछ खाद्य पदार्थों में महीने के दौरान अपस्फीति देखी गई।
ईंधन की कीमतें सुस्त रहीं। इसके तहत बिजली, गैस और अन्य ईंधन श्रेणी में महंगाई मार्च में 1.65 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 0.69 प्रतिशत हो गई। हालांकि, रेस्तरां और आवास जैसी सेवाओं पर ईंधन की कीमतों का अप्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देता है। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, ‘एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के बाद रेस्तरां और आवास सेवाओं की मुद्रास्फीति में वृद्धि संभवतः उच्च इनपुट लागतों के प्रभाव को दर्शाती है।’ भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समिति की 8 मई को समाप्त हुई बैठक में वित्त वर्ष 27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की महंगाई 4.6 प्रतिशत होने का अनुमान जताया था।