प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
सरकारी स्वामित्व वाले राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने शुक्रवार को निवेशकों द्वारा उच्च यील्ड की मांग के बाद 7,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड के री-इंश्योरेंस की योजना को वापस ले लिया है। सूत्रों ने बताया कि लक्षित इश्युएंस राशि के मुकाबले केवल 3,000 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।
एक बाजार प्रतिभागी ने बताया, ‘नाबार्ड के जुलाई 2029 के बॉन्ड के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की बोलियां 7.79 प्रतिशत यील्ड पर आईं। बेस इश्यू का आकार 2,000 करोड़ रुपये था, जिसमें 5,000 करोड़ रुपये के ग्रीन शू का विकल्प था। हालांकि केवल 3,030 करोड़ रुपये की ही बोली मिली, जिससे इश्यू को वापस ले लिया गया।’ हाल के महीनों में ज्यादातर जारीकर्ताओं ने पश्चिम एशिया के संकट, यील्ड की अस्थिरता, ब्याज दर की अनिश्चितता और निवेशकों द्वारा बरती जा रही सावधानी को देखते हुए 2 से 3 साल की छोटी अवधि की उधारी को प्राथमिकता दी है।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘सबसे उच्च-गुणवत्ता वाले एएए जारीकर्ताओं में से एक होने के बावजूद नाबार्ड ने अपने बॉन्ड इश्यू को रद्द कर दिया, जिससे बॉन्ड बाजार में वर्तमान में हो रहे एक गहरे बदलाव का पता चलता है। इससे पता चलता है कि बाजार में तेजी से फंडिंग की कमी की स्थिति की ओर बढ़ रहा है और लगातार अस्थिरता के कारण दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन रही है। निवेशक बाजार में सबसे मजबूत जारीकर्ताओं से भी अधिक यील्ड की मांग कर रहे हैं।’
इस सप्ताह सरकारी स्वामित्व वाले नैशनल बैंक फॉर फाइनैंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ऐंड डेवलपमेंट (नैबफिड) ने 10 साल के बॉन्ड से 7.74 प्रतिशत के कट-ऑफ यील्ड पर 4,000 करोड़ रुपये जुटाए। यह वर्तमान बॉन्ड बाजार के माहौल में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति थी, क्योंकि हाल के महीनों में अधिकांश जारीकर्ताओं ने छोटी अवधि की उधारी को प्राथमिकता दी है।