महीनों तक भारी मुश्किलें झेल चुके माइक्रोफाइनैंस ऋणदाता अभी पटरी पर लौट ही रहे थे कि कमजोर मॉनसून जैसे पुराने जोखिम ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने भी आगाह किया है कि खरीफ के मौसम में 12 राज्यों पर अल नीनो का काफी गंभीर असर पड़ सकता है। मंत्रालय की चेतावनी ने माइक्रोफाइनैंस उद्योग की चिंता को और गहरा दिया है क्योंकि कमजोर मॉनसून से ग्रामीण आय पर बुरा असर पड़ सकता है और कर्ज वसूली प्रभावित हो सकती है।
कृषि मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे सबसे ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में जिला-स्तरीय तंत्र के जरिये समन्वित कार्रवाई करने का आज निर्देश दिया। खरीफ 2026 की तैयारियों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन 9 से 10 राज्यों में अल-नीनो का असर ज्यादा हो सकता है, वहां जिलाधिकारियों, कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों और संबंधित जिलों के अन्य विस्तार तंत्रों के साथ मिलकर बैठकें आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने राज्यों को जोखिम वाले जिलों की स्पष्ट पहचान कर फसल के हिसाब से आपात योजनाएं पहले से तैयार रखने को कहा ताकि मौसम संबंधी चुनौतियों की स्थिति में किसानों को तुरंत विकल्प, सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रिपोर्ट में कहा कि अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले 12 राज्यों के 326 जिलों के लिए आपातकालीन योजनाएं तैयार की जा रही हैं। माइक्रोफाइनैंस ऋणदाता अब ग्रामीण कर्जदारों पर बारीकी से नजर रखने के लिए फील्ड टीमें तैनात कर रहे हैं। उन्हें चिंता है कि अल नीनो की वजह से मॉनसून में बारिश कम हुई तो कर्ज वसूली में देर हो सकती है और परिचालन लागत बढ़ सकती है।
माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (एमफिन) की नवीनतम ‘माइक्रोमीटर’ रिपोर्ट के अनुसार सात तिमाहियों तक गिरावट के बाद भारत का माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में पटरी पर लौट आया। सकल ऋण पोर्टफोलियो 3 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 3.25 लाख करोड़ रुपये हो गया और परिसंपत्ति की गुणवत्ता सुधरकर मार्च 2024 से पहले के स्तर पर पहुंच गई। इस तिमाही के दौरान कर्ज आवंटन 77,524 करोड़ रुपये रहा जो पिछली सात तिमाही में सबसे अधिक है। 31 से 180 दिनों के लिए कर्ज पर जोखिम एक साल पहले के 6.3 फीसदी से घटकर 2 फीसदी रह गया। 31 से 180 दिनों के लिए कर्ज पर जोखिम का मतलब है कि संबंधित कर्ज की किस्तें 31 से 180 दिन से बकाया है।
मुथूट माइक्रोफिन के मुख्य कार्याधिकारी सदाफ सईद ने कहा, ‘हम लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और ग्राहकों से नियमित रूप से बात कर रहे हैं। हमारे फील्ड अधिकारी उनके संपर्क में रहते हैं, इसलिए अगर कोई नई बात होती है तो हमें तुरंत पता चल जाता है। यदि मॉनसून के दौरान बारिश उम्मीद से कम होती है तो कर्ज वसूली पर कुछ असर पड़ सकता है लेकिन बड़ा प्रभाव नहीं होगा क्योंकि ज्यादातर ग्राहक दोहरी आय वाले परिवार से हैं।’
भारत के मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसूनी बारिश लंबे समय के औसत की लगभग 90 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो सामान्य से कम बारिश का संकेत है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अभी अल-नीनो की स्थिति बनी हुई है और जून-सितंबर के मॉनसून के दौरान इसके और मजबूत होने की आशंका है।
ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर कर्ज देने वाले ऋणदाताओं की तत्काल चिंता कर्ज की वसूली है क्योंकि लंबे अरसे बाद यह पटरी पर आ रहा था। फ्यूजन फाइनैंस के प्रबंध निदेशक व मुख्य
कार्याधिकारी संजय गरयाली ने कहा, ‘हम ग्राहकों से बात कर रहे हैं ताकि यह समझ सकें कि वे क्या अनुभव कर रहे हैं और क्या उन्हें जमीनी स्तर पर कोई असर दिख रहा है। अभी तक, हमारी टीमों को चिंता की कोई बात नजर नहीं आई है।’
उन्होंने कहा, ‘आने वाले कुछ दिनों में मैं और शीर्ष प्रबंधन की पूरी टीम स्थिति का आकलन करते रहेंगे और इस बात पर नजर रखेंगे कि ग्राहक इसे किस तरह देख रहे हैं।’ ऋणदाताओं का कहना है कि उनके बहुत से ग्राहकों की आय के अब कई स्रोत हैं। वे खेती के साथ-साथ पशुपालन, छोटे-मोटे कारोबार या मजदूरी जैसे काम भी करते हैं। आय के इन अलग-अलग स्रोतों से उन्हें मौसम से जुड़ी मुश्किलों से निपटने में कुछ मदद मिलती है।
हालांकि बारिश में थोड़ी सी भी कमी कर्जदारों के व्यवहार को बदल सकती है। फसल की पैदावार कम होने से परिवारों को आमदनी की कमी को पूरा करने के लिए ज्यादा उधार लेना पड़ सकता है, जिससे वसूली में सुधार की रफ्तार धीमी हो सकती है।
एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-एमएफआई के कार्याधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘इसका पहला असर आम तौर पर कर्ज नहीं चुकाने से ज्यादा नकदी प्रवाह पर पड़ता है। कर्ज वसूली में सुधार में कुछ हफ्तों से ज्यादा समय लग सकता है। फील्ड अधिकारी को इसके लिए ज्यादा चक्कर लगाने पड़ सकते हैं और परिचालन खर्च बढ़ सकता है। चिंता की बात यह है कि सुधार का जो रुझान अब तक दिख रहा था, वह शायद अब स्थिर हो जाए।’
सूक्ष्म वित्त उद्योग की सतर्कता 2024 की उन यादों को भी दर्शाती है, जब बहुत ज्यादा कर्ज देने, उधार लेने वालों पर अत्यधिक कर्ज होने और ऋण वसूली में रुकावटों की वजह से भुगतान में चूक और कर्ज के फंसने के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ था। उस दौरान ऋणदाताओं ने कर्ज बांटने की रफ्तार कम करके, अंडरराइटिंग के कड़े नियम लागू करके और ऋण वसूली के प्रयास तेज करके इस समस्या का समाधान किया था। एमफिन के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि इन उपायों का आखिरकार असर दिखने लगा था।
इसीलिए मॉनसून के अनुमान पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। ग्रामीण भारत का एक बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है और लंबे समय तक बारिश कम रहती है तो इससे किसानों की कमाई पर असर पड़ सकता है और कर्ज वसूली में देर हो सकती है।