कॉरपोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों ने मांग की है कि एचडीएफसी बैंक के पूर्व अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से संबंधित हालात की जांच के लिए एक स्वतंत्र निदेशकों की समिति का गठन किया जाए। हालांकि प्रॉक्सी सलाहकारों का कहना है कि बैंक में तत्काल कोई गवर्नेंस संबंधी चिंताएं नहीं हैं, लेकिन चक्रवर्ती के इस्तीफे पत्र की अस्पष्टता ने निवेशकों के बीच अटकलों को जन्म दिया है।
प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इनगवर्न के संस्थापक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा कि मौजूदा प्रबंधन की टिप्पणी न तो सीधी है और न ही विश्वसनीय। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा अंतरिम चेयरमैन और सीईओ के बयान निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए अपर्याप्त हैं।
सुब्रमण्यन ने कहा, बोर्ड को यह पता लगाने के लिए स्वतंत्र निदेशनों की समिति गठित करनी चाहिए कि वास्तव में क्या हुआ और स्पष्टीकरण देना चाहिए। हमें यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यक्तिगत विवाद का मामला है या इसके पीछे कोई अंतर्निहित कारण हैं। अगर यह व्यक्तिगत विवाद का मामला है तो कंपनी को इस बारे में खुलकर बताना चाहिए।
अगर वे अतनु चक्रवर्ती पर आरोप लगाना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन यह स्वतंत्र निदेशकों की समिति द्वारा ही होना चाहिए।
स्टेकहोल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विसेज (एसईएस) के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक जेएन गुप्ता ने बताया कि इस्तीफे पत्र की अस्पष्टता ने चक्रवर्ती के स्वयं के आचरण के संबंध में भी सवाल खड़े किए हैं।
गुप्ता ने कहा, चेयरमैन बोर्ड का नेतृत्व करते हैं, एजेंडा तय करते हैं और मिनट्स को अंतिम रूप देते हैं। अगर चेयरमैन की चिंताओं को बोर्ड द्वारा खारिज कर दिया जाता है तो उन्हें कार्यवाही में दर्ज किया जा सकता है। गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों को इस बारे में स्पष्ट राय देनी चाहिए कि क्या बैंक में हो रहे घटनाक्रमों को लेकर उनकी भी ऐसी ही चिंताएं हैं या यह बोर्ड और चेयरमैन के बीच मतभेदों का मामला है।