सरकारी संस्थान राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और आरईसी ने 11,000 करोड़ रुपये की बॉन्ड जारी करने की योजना गुरुवार को रद्द कर दी। सूत्रों ने बताया कि दोनों संस्थानों ने सीमित निविदाएं मिलने और स्वीकार्य दर से उच्च यील्ड के कारण बॉन्ड जारी करना रद्द किए। इस क्रम में आरईसी ने दो वर्षीय बॉन्ड जारी करने की योजना को खारिज कर दिया लेकिन इसने पांच वर्षीय बॉन्ड पर 7.19 प्रतिशत की दर से 3,000 करोड़ रुपये जुटाए।
नाबार्ड सात साल और तीन महीने में परिपक्व होने वाले बॉन्ड के माध्यम से 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा था। इसके अलावा आरईसी लिमिटेड ने दो साल और पांच साल में परिपक्व होने वाले बॉन्ड की दो किस्तों से धन जुटाने की योजना बनाई थी। इसमें हरेक किस्त 3000 करोड़ रुपये की थी। इससे पहले सरकारी स्वामित्व वाले लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने 4 मार्च को 8,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बॉन्ड जारी करने की योजना को वापस ले लिया था।
बाजार के जानकारों का कहना है कि बॉन्ड बाजार में गतिविधि सीमित बनी हुई है। जारीकर्ता मुख्य रूप से लंबी अवधि के बॉन्डों में ही कम ब्याज दरों पर धन जुटाने में सक्षम हैं, जहां दीर्घकालिक निवेशकों के पास निवेश करने के लिए पर्याप्त नकदी है। हालांकि जिन जारीकर्ताओं को ऐसे निवेशकों से रुचि नहीं मिल रही है, उन्हें अनुकूल दरों पर धन जुटाना मुश्किल हो रहा है। अल्पकालिक बॉन्ड खंड में विशेष रूप से ईरान से संबंधित घटनाक्रमों के कारण अस्थिरता का स्तर ऊंचा बना हुआ है।