भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फाइल फोटो
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि जमा राशि पर नियामक की ओर से तय दायरे से अलग-अलग ब्याज दरें देना स्वीकार्य नहीं है। ये दरें जमा की अवधि और ग्राहक की श्रेणी जैसे कारकों पर आधारित होनी चाहिए।
मल्होत्रा ने नीतिगत घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हम अलग-अलग ब्याज दरों की इजाजत देते हैं। जमाओं पर अलग-अलग ब्याज दरें कब लागू हो सकती हैं, इसे लेकर आरबीआई की बहुत ही स्पष्ट और एक जैसी नीति है। वरिष्ठ नागरिकों समेत कुछ खास श्रेणियों और जमा अवधि के आधार पर बैंक अलग-अलग दरें रख सकते हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्हें पारदर्शी भी रहना होगा। उन्हें ये दरें सभी के सामने साफ तौर पर प्रदर्शित करनी होंगी। अगर कोई इससे अलग दर की पेशकश करता है तो वह निश्चित रूप से स्वीकार्य नहीं है।
मल्होत्रा की ये टिप्पणियां एक मीडिया रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद आई हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े लेनदार एचडीएफसी बैंक की एक आंतरिक जांच में पाया गया कि वित्त वर्ष 24 और 25 के दौरान महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) को लगभग 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। यह भुगतान विपणन खर्च के तौर पर किया गया था, जिसे डिफरेंशियल इंटरेस्ट (ब्याज में अंतर) के रूप में दिखाया गया था।
एचडीएफसी बैंक ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा, बैंक के पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल प्रोसेस व सिस्टम है।
एचडीएफसी बैंक ने एक बयान में कहा, सभी मामलों से बैंक के तय नियमों के अनुसार निपटा जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम फैसला लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर गड़बड़ी या जिम्मेदारी के किसी भी कयास को पूरी तरह खारिज करते हैं।
यह घटनाक्रम बैंक के कामकाज के तौर-तरीकों पर उठ रहे सवालों के ठीक बाद हुआ है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बैंक में कुछ घटनाएं और तौर-तरीके उनके मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे।