वित्त-बीमा

बैंकिंग सिस्टम में नकदी का संकट? RBI डालेगा ₹1 लाख करोड़, टैक्स भुगतान के दबाव के बीच बड़ी राहत

आरबीआई ने अग्रिम कर भुगतान और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बैंकिंग प्रणाली में नकदी की कमी को दूर करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के ओएमओ (OMO) की घोषणा की है

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- March 08, 2026 | 10:56 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने  अल्पकालिक दबावों को दूर करने के लिए नकदी प्रबंधन का सुनियोजित तरीका अपनाया है। रिजर्व बैंक सतत ढंग से नकदी उपलब्ध करा रहा है। इस क्रम में रिजर्व बैंक ने 1 लाख करोड़ रुपये के ओपन मार्केट ऑपरेशंस की नवीनतम घोषणा की है। इस घोषणा का ध्येय इस महीने अग्रिम कर के कारण नकदी प्रबंधन से निकासी होने के कारण बैंकिंग प्रणाली में आई कमी को आसान बनाना है।

बहरहाल, तात्कालिक कारण मौसमी कर भुगतान है। इस सिलसिले में बाजार के जानकारों का कहना है कि यह कदम प्रणाली में स्थायी तरलता पर व्यापक दबाव को भी दर्शाता है। दरअसल, नकदी पर पहले के खरीद-बिक्री स्वैप समझौतों की परिपक्वता और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रुपये को स्थिर करने के लिए रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप का असर पड़ा है।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को बैंकिंग प्रणाली में 3.02 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि थी। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि वह 50,000 की अलग-अलग दो किस्तों में ओएमओ खरीदारी करेगा। बाजार के प्रतिभागियों के अनुसार यह कदम नकदी की कमी को पाटने के उद्देश्य से किया गया है। 

दरअसल, अग्रिम कर भुगतान और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) निपटान के कारण नकदी की कमी होने की आशंका है।  करूर वैश्य बैंक में ट्रेजरी प्रमुख वीआरसी रेड्डी ने कहा, ‘ रिजर्व बैंक ने ओएमओ के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये की दो किस्तों में 1 लाख करोड़ रुपये की टिकाऊ नकदी डालने का फैसला किया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब अग्रिम कर और जीएसटी निकासी के कारण नकदी प्रणाली के अस्थायी रूप से घाटे में जाने की उम्मीद है। हालांकि, इन दबावों से परे, बाय/सेल स्वैप की मैच्योरिटी और वेस्ट एशिया संकट के बढ़ने के बाद डॉलर/रुपये बाजार में लगातार हस्तक्षेप से टिकाऊ नकदी भी प्रभावित हुई है।’

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि अग्रिम सौदे उच्च स्तर पर बने हुए हैं।  इसका कारण यह है कि रिजर्व बैंक ने रुपये को स्थिर करने के लिए स्पॉट डॉलर की सीधी बिक्री के बजाय फॉरवर्ड और स्वैप हस्तक्षेपों पर तेजी से भरोसा किया है। इससे वह विदेशी मुद्रा भंडार के तत्काल आहरण से बच सके। हालांकि, बड़ी फॉरवर्ड बुक का मतलब है कि इन अनुबंधों के परिपक्व होने पर भविष्य में पर्याप्त डॉलर देनदारियां होंगी। इससे आने वाले महीनों में घरेलू नकदी स्थितियों और मुद्रा बाजार की गतिशीलता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

जनवरी के अंत तक रुपये के फॉरवर्ड बाजार में रिजर्व बैंक की बकाया नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन दिसंबर के अंत तक 62.35 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 68.42 अरब डॉलर हो गई।

First Published : March 8, 2026 | 10:54 PM IST