भारतीय रिजर्व बैंक टर्म मनी मार्केट को गैर बैंकिंग इकाइयों के लिए खोलेगा। इन गैर बैंकिंग इकाइयों में एआईएफआई, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां और कॉरपोरेट्स शामिल हैं। यह जानकारी रिजर्व बैंक ने बुधवार को डेवलपमेंट ऐंड रेगुलेटरी पॉलिसियों के वक्तव्य में दी।
टर्म मनी मार्केट बाजार का वह हिस्सा है जहां 14 दिन से लेकर एक वर्ष तक की अवधि के लिए धन उधार लिया और दिया जाता है। यह लेन देन आमतौर पर बिना जमानत के होते हैं और गैर-हस्तांतरणीय होते हैं। ये वाणिज्यिक पत्रों (सीपी) और जमा प्रमाणपत्रों (सीडी) से अलग होते हैं।
रिजर्व बैंक ने बताया कि यह कदम नकदी बढ़ाने और मौद्रिक नीति के प्रसारण को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चूंकि बैंक टर्म मनी मार्केट में शुद्ध ऋणदाता हैं। इसलिए यह कदम सकारात्मक है। तर्क यह दिया कि इस कदम से धन की मांग बढ़ेगी और इंट्राडे अधिशेष नकदी का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे भविष्य में यील्ड पर मामूली असर पड़ने की भी उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम समझते हैं कि यह महत्त्वपूर्ण कदम है जिससे सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार की मजबूती और दायरा बढ़ेगा। इससे भविष्य की यील्ड में वृद्धि होगी।’
अब तक, इस खंड में भागीदारी बैंकों और एकल प्राथमिक डीलरों तक सीमित थी। केंद्रीय बैंक ने बाजार गतिविधियों में मदद करने के लिए एकल प्राथमिक डीलरों के लिए उधार सीमा बढ़ाने का भी फैसला किया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि टर्म मनी मार्केट, जो ओवरनाइट अवधि से इतर धन उपलब्ध कराता है, अल्पकालिक दरों को लंबी अवधि की ब्याज दरों से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस कदम से प्रतिभागी आधार व्यापक होने, मूल्य खोज में सुधार होने और यील्ड कर्व में नीतिगत संकेतों का संचारण मजबूत होने की उम्मीद है।