वित्त-बीमा

क्या लोन डिफॉल्ट घट रहे हैं? बैंकिंग सेक्टर के लिए राहत की खबर

जनवरी में लोन की गुणवत्ता सुधरी, लेकिन आगे जोखिम बना हुआ

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- April 01, 2026 | 8:52 AM IST

ट्रांसयूनियन सिबिल के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी भवेश जैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बातचीत में बताया कि दिसंबर की तुलना में जनवरी में मैक्रो लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (एलएपी), वाणिज्यिक वाहनों व निर्माण उपकरणों को छोड़कर ऋणदाताओं के रिटेल पोर्टफोलियो की गुणवत्ता सुरक्षित और असुरक्षित दोनों खंडों में सुधरी है। उधर अभी तक पश्चिम एशिया संघर्ष का ऋणदाताओं के रिटेल पोर्टफोलियो पर प्रभाव नहीं देखा गया है और इस पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।

जैन ने कहा, ‘ऋणदाताओं को आवश्यकता-आधारित और जिम्मेदार क्रेडिट उपयोग के मामले में उधारकर्ताओं को लगातार मार्गदर्शन करना होगा और अनुशासित पुनर्भुगतान व्यवहार तय करना होगा। भारतीय बाजार ने हाल की प्रमुख घटनाओं में विशेष रूप से कोविड के दौरान सभी हितधारकों के बीच मजबूत समन्वय और मार्गदर्शन के कारण काफी अच्छा प्रदर्शन किया।’

उन्होंने कहा कि मॉरेटोरियम ने निश्चित रूप से अंतिम उपयोगकर्ताओं की मदद की लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण कारक ऋणदाताओं और उधारकर्ताओं के बीच निरंतर जुड़ाव था, जो उन्हें ऋण के उचित अंतिम-उपयोग पर मार्गदर्शन दे रहा था और समय पर पुनर्भुगतान पर जोर दे रहा था।

उन्होंने कहा, ‘यह जुड़ाव कोविड अवधि के दौरान महत्त्वपूर्ण था। वर्तमान परिवेश में भी इसी तरह के दृष्टिकोण का पालन करने की जरूरत है। हालांकि ऋणदाता पहले से ही ऐसा कर रहे हैं, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इन प्रयासों को और मजबूत करने का अवसर है।’ पश्चिम एशिया संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ और अब एक महीने से अधिक समय से चल रहा है। बैंकरों ने कहा है कि यदि संघर्ष जारी रहता है तो वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में उनके पोर्टफोलियो की गुणवत्ता पर इसका प्रभाव पड़ सकता है, भले ही वित्त वर्ष 26 में नहीं पड़े।

First Published : April 1, 2026 | 8:52 AM IST