भारत के कर्ज बाजार में एक दिलचस्प तस्वीर उभर रही है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कर्ज देने की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि सुरक्षित कर्ज यानी घर, गाड़ी और सोने के बदले मिलने वाले कर्ज तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ समय से दबाव में चल रहा असुरक्षित कर्ज भी अब धीरे-धीरे संभलने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार माइक्रोफाइनेंस और छोटे एमएसएमई कर्ज में पहले जो दबाव दिखा था, उसके कारण बैंकों और एनबीएफसी ने छोटे कर्ज देने में सतर्कता बरती थी। लेकिन अब डिफॉल्ट के मामलों में कमी आने लगी है, जिससे कर्ज देने का भरोसा फिर से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार देश में हाउसिंग लोन का कुल पोर्टफोलियो तीसरी तिमाही में करीब 43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि नए कर्ज देने की रफ्तार में थोड़ी नरमी जरूर दिखी है, लेकिन बाजार में एक बड़ा बदलाव साफ नजर आ रहा है। बैंक और वित्तीय संस्थान अब छोटे कर्ज की तुलना में बड़े और बेहतर प्रोफाइल वाले ग्राहकों को ज्यादा होम लोन दे रहे हैं। कम लागत पर पैसा मिलने और कम ब्याज दरों की वजह से सरकारी बैंकों की इस क्षेत्र में हिस्सेदारी बढ़ी है।
वाहन कर्ज के बाजार में भी तीसरी तिमाही में अच्छी तेजी देखने को मिली। जीएसटी 2.0, ब्याज दरों में कटौती और त्योहारी खरीदारी के कारण गाड़ियों की मांग बढ़ी, जिससे वाहन कर्ज देने वाली कंपनियों के कारोबार को सहारा मिला। उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट लगभग 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहीं तो आगे चलकर वाहन खरीद पर असर पड़ सकता है।
इस दौरान सबसे ज्यादा तेजी गोल्ड लोन सेगमेंट में देखी गई। सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और असुरक्षित कर्ज को लेकर सतर्कता के कारण लोगों ने सोने के बदले कर्ज लेना ज्यादा पसंद किया। तीसरी तिमाही में गोल्ड लोन का कुल पोर्टफोलियो करीब 16.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बड़े कर्ज में सरकारी बैंक मजबूत बने हुए हैं, जबकि छोटे कर्ज के बाजार में एनबीएफसी तेजी से अपनी पकड़ बढ़ा रहे हैं।
कुछ समय पहले नियामकीय सख्ती और बढ़ते डिफॉल्ट के कारण पर्सनल लोन की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। लेकिन अब इसमें फिर तेजी दिखाई देने लगी है। तीसरी तिमाही में नए पर्सनल लोन वितरण में सालाना आधार पर करीब 35 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। एसेट क्वालिटी में सुधार और शुरुआती चरण के डिफॉल्ट में कमी आने से बैंकों और एनबीएफसी का भरोसा फिर मजबूत हुआ है।
टीवी, मोबाइल और अन्य घरेलू सामान खरीदने के लिए मिलने वाले कर्ज में भी सुधार देखा गया है। त्योहारी सीजन और जीएसटी में कटौती के कारण इस सेगमेंट में कर्ज की मांग बढ़ी है। इस बाजार में एनबीएफसी की पकड़ सबसे मजबूत बनी हुई है और ज्यादातर कर्ज इन्हीं कंपनियों के जरिए दिया जा रहा है।