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Sebi का प्रस्ताव: सिक्योरिटाइजेशन में 1 करोड़ का न्यूनतम निवेश और डीमैट फॉर्म जरूरी

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सेबी ने यह भी प्रस्तावित किया है कि सभी सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स केवल डीमैट फॉर्म में ही जारी और ट्रांसफर किए जाएं।

Last Updated- November 03, 2024 | 3:01 PM IST
SEBI

बाजार नियामक सेबी ने सिक्योरिटाइजेशन गतिविधियों में लगे आरबीआई द्वारा नियंत्रित और गैर-नियंत्रित संस्थाओं के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 1 करोड़ रुपये तय करने का प्रस्ताव दिया है। सेबी ने यह भी सुझाव दिया है कि निजी प्लेसमेंट के माध्यम से जारी किए गए सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स (SDIs) को अधिकतम 200 निवेशकों तक ही सीमित रखा जाए। यदि यह सीमा पार होती है, तो इसे सार्वजनिक निर्गम यानी पब्लिक इश्यू के रूप में मानना होगा।

सार्वजनिक निर्गम को कम से कम तीन दिन और अधिकतम 10 दिन तक खुला रखा जाना चाहिए और इसमें विज्ञापन के नियम सेबी के गैर-परिवर्तनीय सिक्योरिटी के दिशानिर्देशों के अनुसार होने चाहिए।

सेबी ने यह भी प्रस्तावित किया है कि सभी सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स केवल डीमैट फॉर्म में ही जारी और ट्रांसफर किए जाएं।

SDIs वित्तीय उत्पाद होते हैं जो विभिन्न प्रकार के कर्ज, जैसे लोन, मॉर्गेज या बकाया राशि को एक साथ जोड़कर बनाए जाते हैं और फिर निवेशकों को बेचे जाते हैं। इस प्रक्रिया को सिक्योरिटाइजेशन कहा जाता है, जिससे बैंक जैसे संस्थान अपनी कम तरल संपत्तियों को तरल संपत्तियों में बदल सकते हैं और एक वैकल्पिक वित्तीय स्रोत प्राप्त कर सकते हैं।

इन सिक्योरिटाइजेशन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने वाले निवेशकों को उनके कर्ज पूल के प्रदर्शन के आधार पर रिटर्न मिलता है। इससे जोखिम कई संपत्तियों में फैला रहता है, जिससे अच्छे रिटर्न मिलने की संभावना होती है।

वर्तमान नियम सेबी के 2008 के रेगुलेशन और आरबीआई के 2021 के दिशानिर्देशों पर आधारित हैं। अब, सेबी सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए नए नियम तैयार करने पर विचार कर रहा है और इस पर जनता से 16 नवंबर तक सुझाव मांगे गए हैं।

जोखिम प्रबंधन के तहत, सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि कर्ज जारी करने वाले संस्थान (ओरिजिनेटर) को कर्ज के पूल का कम से कम 10 प्रतिशत या 24 महीनों तक की अवधि वाले बकायों का 5 प्रतिशत जोखिम बनाए रखना होगा।

सेबी ने यह भी कहा है कि कर्ज की रकम पर संस्थान की रुचि बनी रहे, इसके लिए न्यूनतम होल्डिंग अवधि की आवश्यकता होगी।

इसके अलावा, सेबी ने “क्लीन-अप कॉल” का सुझाव भी दिया है, जिससे ओरिजिनेटर को संपत्तियों के मूल मूल्य का 10 प्रतिशत तक पुनर्खरीद करने का विकल्प मिलेगा। यह विकल्प वैकल्पिक होगा और इसे पूल की अवधि को मैनेज करने के लिए दिया गया है।

नकदी प्रवाह में अंतर को संभालने के लिए तरलता सुविधाएं या तो ओरिजिनेटर द्वारा सीधे या किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से प्रदान की जानी चाहिए।

“ऋण/बकायों” की नई परिभाषा के तहत अब सूचीबद्ध ऋण सिक्योरिटी, स्वीकृत व्यापार बकाया, किराये की आय और उपकरण किराये को ही शामिल किया गया है, जबकि एकल संपत्ति के सिक्योरिटाइजेशन की अनुमति नहीं है।

प्रस्ताव में ओरिजिनेटर और उधारकर्ताओं के लिए न्यूनतम अनुभव की आवश्यकता भी रखी गई है। ओरिजिनेटर के पास कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए, जबकि व्यापार बकाया के लिए कम से कम दो चक्रों के सफल और बिना डिफॉल्ट वाले भुगतान की आवश्यकता होगी।

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First Published - November 3, 2024 | 3:01 PM IST

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