खस्ताहाल कंपनी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
एक खस्ता हाल कंपनी, जो बड़े ऑर्डर तो दे देती है और विक्रेता को चेक भी जारी करती है लेकिन भुगतान का उसका कोई वास्तविक इरादा नहीं होता है, पर फौजदारी मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने एक मामले में यह आदेश दिया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि ऐसी कंपनी पर निगोशिएबल […]
लागत प्रबंधन की उपादेयताएं,सीमाएं और अवसर
हर कंपनी ऐसे उत्पाद और सेवाएं देना चाहती है, जो उपभोक्ताओं द्वारा पसंद की जाएं। इस उत्पाद की गुणवत्ता और मूल्यों से जुड़ी सारी बातें ग्राहकों की संतुष्टि पर निर्भर करती हैं और इसी के आधार पर उत्पादों का मूल्य निर्धारित किया जाता है। किसी एक ही उत्पाद के लिए ग्राहकों को संतुष्ट करने के […]
व्यापार गोष्ठी: शेयर बाजार के हिचकोलों से बैठ रहे दिल?
बाजार में फिर से आएगी बहार शेयर बाजार का निवेश लंबे समय का निवेश माना जाता है। बाजार के निवेशकों को इतनी जल्दी हार नहीं माननी चाहिए। यदि हम औसतन भी देखें तो हर तीन साल में बाजार 30 से 40 फीसदी तक ऊपर चला जाता है। जिन लोगों ने 1970 में शेयर बाजार में […]
छोटी शहजादी की बड़ी रफ्तार
अपनी श्रेणी में मर्सिडीज बेंज ई क्लास का जलवा बदस्तूर कायम है। यह अपने आप में इतनी खास है कि पूरे सेगमेंट को ही ई क्लास के नाम से जाना जाता है। वास्तव में यह संयोग ही है, लेकिन क्या आप मर्सिडीज बेंज की कारों की एक पूरी श्रृंखला का नाम ई क्लास पड़ने के […]
महज दिखावा है कारों पर नया कर
लग्जरी या फिर ऐसे उत्पादों पर कर लगाना जिसकी खपत को सरकार कम करना चाहती है, एक पुरानी चाल रही है। यह अलग बात है कि यह चाल कुछ खास कारगर साबित नहीं हो पाई हो। बड़े इंजन वाली कारों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से आलीशान कारों की कीमतों में लगभग दो फीसदी की बढ़ोतरी […]
कोलकाता मेट्रो परियोजना में प्रबंधन का मकड़जाल
सामान्यत: किसी भी कार्पोरेट ढांचे में अगर कोई व्यक्ति या संस्था इक्विटी के माध्यम से सीधे या कर्ज की गारंटी के माध्यम से परोक्ष रूप से परियोजना के लिए फंड देती है, तो उस पर नियंत्रण उसी का होता है। बेहतर प्रबंधन करने वाले उद्यमी आमतौर पर संगठन का प्रबंधन करने के लिए- अगर वे […]
बदला है दस्तूर, पर फिक्रमंदी तो जारी है…
पिछले एक दो साल में भारत के आर्थिक विकास को लेकर कई अध्ययन रिपोर्ट, शोध और पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और उन सबका एक ही निष्कर्ष निकल कर आया है कि देश की विकास दर एक अकाटय सच्चाई है और इसके सतत रहने की उम्मीद है। वर्ष 2003 के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में […]
सोने पर सुहागा या फिर सोना देगा आपको दगा
सोना परिसंपत्ति वर्ग में अपनी चमक से पिछले एक वर्ष से सभी को चकाचौंध कर चुका है। खासतौर पर पिछले 6 महीनों में, जिस समय इक्विटी बाजारों में मंदी का दौर था, उस समय भी सोना आसमान की बुलंदियां छू रहा था। अगर विश्वास न हो तो एक बार इन आंकड़ों पर भी नजर डाल […]
लंबे समय के लिए एन्डाउमेंट बेहतर भी और सुरक्षित भी
पिछले कुछ वर्षों में टर्म प्लान का नाम कई बार सुनने में आया है। किसी भी वित्तीय योजनाकार की बीमा की जरूरतों को पूरा करने के लिहाज से पहली पसंद हमेशा टर्म प्लान ही रहते हैं, आखिर इनमें लागत कम है। सामान अवधि के दौरान यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाओं का बाजार में काफी दबदबा रहा, […]
मुट्ठी भर पैसा और देखे ढेर सारे ख्वाब
अक्सर वित्तीय योजना को जल्द पैसा बनाने के लिहाज से देखा जाता है। नतीजतन हमारा ध्यान परिसंपत्ति वर्ग और कुछ खास निवेश योजनाओं पर ही रहता है, जिसमें निश्चित दर पर रिटर्न कमाया जा सके। यहीं आपकी पूरी योजना गड़बड़ा सकती है। ज्यादातर लोग जो योजनाबध्द तरीके से बढ़ते हैं, वे ठीक उसी समय सब […]
