पश्चिम एशिया संकट के कारण शिपिंग लाइनें बाधित होने का सीधा असर निर्यात पर पड़ रहा है। बासमती चावल के निर्यात पहले ही काफी नुकसान उठा रहे थे, अब कृषि निर्यात में महत्त्वपूर्ण स्थान रखने वाला भैंस के मांस की खेप को बंदरगाहों से वापस बुलाना शुरू कर दिया है, क्योंकि इसे अधिक दिनों तक बंदरगाहों पर रोक कर नहीं रखा जा सकता। इसके सड़ने का डर बना रहता है और यदि ऐसा हुआ तो निर्यातकों को भारी क्षति हो सकती है।
उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अन्य खाद्य वस्तुओं के विपरीत जमे हुए भैंस के मांस को लंबे समय तक संग्रहीत नहीं किया जा सकता है, क्योंकि भारत के बंदरगाहों में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। यही कारण है कि अधिकांश निर्यातकों ने पश्चिम एशिया के लिए भेजी गईं खेपों को बंदरगाहों से शीघ्र वापस बुलाने का फैसला किया है।’
उन्होंने कहा कि मांस की खेप वापस लाने में निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत आएगी। वे युद्ध की वजह से पहले ही अतिरिक्त परिवहन शुल्क का भुगतान कर रहे हैं। भारत औसतन हर महीने भैंस के मांस के लगभग 4200 से 4400 कंटेनर भेजता है, जिनमें से लगभग 40 से 50 प्रतिशत पश्चिम एशिया जाते हैं। खाड़ी देश भारत के जमे हुए मांस उत्पादों के लिए अब तक का सबसे बड़ा बाजार हैं।
भारत से सऊदी अरब, बहरीन, दुबई और यूएई आदि में सबसे अधिक भैंस का मांस भेजा जाता है। प्रति वर्ष पर लगभग 4 अरब डॉलर मूल्य का भैंस का मांस निर्यात किया जाता है जो देश के सबसे बड़े कृषि निर्यातों में से एक है। यह देश भर में लाखों मवेशी किसानों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।
उद्योग अधिकारी ने बताया, ‘रमजान के महीने में परंपरागत रूप से भारत से सबसे अधिक भैंस का मांस निर्यात किया जाता है। इसका निर्यात नवंबर से शुरू होता है और पूरे मार्च तक जारी रहता है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध ऐसे समय छिड़ा जब मांस के शिपमेंट अपने अंतिम गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। संघर्ष के कारण सभी शिपिंग लाइनें बाधित हो गई और शिपमेंट अटक गए।’
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में 300 से अधिक कंटेनरों को निर्यातकों द्वारा बंदरगाहों से वापस बुला लिया गया है, क्योंकि शिपिंग लाइनें कब खुलेंगी, इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। यदि शिपमेंट अधिक समय तक रुका रहा तो मांस के सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा।
ऑल इंडिया मीट ऐंड लाइवस्टॉक एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के फौजान अलावी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘एक उद्योग के रूप में हमें लगता है कि शिपिंग में अनिश्चितता बढ़ रही है। यही वजह है कि हम में से अधिकांश निर्यातक मांस से भरे कंटेनरों को वापस अपने गोदामों में ला रहे हैं। इससे हमारी लागत बढ़ रही है। साथ ही अतिरिक्त माल भाड़ा और बीमा शुल्क भी लग रहे हैं।’