US-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच सरकार ने देश में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। यह16 जून से प्रभावी हो गया है।
राजस्व विभाग द्वारा जारी एक गजट नोटीफिकेशन के मुताबिक डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) या विंडफॉल टैक्स 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। जेट ईंधन के निर्यात पर उत्पाद शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं पेट्रोल पर शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर पूर्ववत बरकरार रखा गया है। घरेलू खपत वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार हर पखवाड़े में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है। पिछली बार की गई समीक्षा 1 जून से प्रभावी है। पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क 27 मार्च से लागू किया गया था, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने के चलते भारतीय रिफाइनरों के निर्यात को घटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की पर्याप्त उपलब्धता का आश्वासन दिया है, साथ ही उपभोक्ताओं से बढ़ती कीमतों के बीच ऊर्जा का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आग्रह किया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीजी) में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि 15 जून तक भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को घरेलू बाजार में पेट्रोल की बिक्री पर 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 27 रुपये प्रति लीटर घाटा हो रहा है। रसोई गैस की बिक्री पर नुकसान प्रति सिलिंडर 700 रुपये तक है।