US Iran Deal: अमेरिका और ईरान के 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। यह समझौता दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नए प्रतिबंधों को लेकर 60 दिनों की वार्ता का रास्ता खोल सकता है।
1. इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही ईरान और अमेरिका, तथा उनके सहयोगी देशों के बीच जारी युद्ध को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त माना जाएगा। इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चे शामिल होंगे। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई, बल प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी से दूर रहने का वचन देते हैं। अंतिम समझौते में इस अनुच्छेद और अन्य सभी अनुच्छेदों की पुष्टि की जाएगी।
2. ईरान और अमेरिका एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
3. दोनों देश अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत कर उसे पूरा करने का प्रयास करेंगे। आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है।
4. समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करेगा, ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के हस्तक्षेप या बाधा को रोकेगा और अधिकतम 30 दिनों के भीतर समुद्री यातायात को पूरी क्षमता के साथ बहाल करेगा। जहाजों की आवाजाही युद्ध के पहले की तरह सुचारू हो जाएगी। अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी भी हटाएगा।
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5. ईरान समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद यह सुनिश्चित करेगा कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच व्यापरिक जहाजों की आवाजाही 30 दिनों के भीतर युद्ध-पूर्व स्तर तक बहाल हो जाए। इसके लिए तकनीकी बाधाओं को दूर करने और समुद्री बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाएगा।
6. अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता वाली व्यापक योजना तैयार करेगा। इसकी कार्यान्वयन व्यवस्था 60 दिनों के भीतर तय की जाएगी।
7. अमेरिका अंतिम समझौते के तहत तय समयसीमा के अनुसार ईरान पर लगे सभी प्रकार के प्रतिबंध समाप्त करेगा। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अमेरिका के प्राथमिक व द्वितीयक प्रतिबंध शामिल होंगे।
8. ईरान दोहराता है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समृद्ध यूरेनियम और अन्य परमाणु मुद्दों, साथ ही ईरान की परमाणु जरूरतों का समाधान अंतिम समझौते में किया जाएगा।
9. अंतिम समझौता होने तक दोनों देश मौजूदा स्थिति बनाए रखेंगे। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं करेगा और अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा तथा क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ाएगा।
10. समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद और प्रतिबंध हटने तक अमेरिका का वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े बैंकिंग, बीमा, परिवहन जैसी सेवाओं के निर्यात के लिए आवश्यक छूट जारी करेगा।
11. अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि वार्ता में प्रगति के साथ ईरान की फ्रिज या अटैच संपत्तियां और धनराशि जारी कर दी जाए। इन फंड्स का उपयोग ईरान का केंद्रीय बैंक अपनी जरूरत के अनुसार कर सकेगा। इसके लिए अमेरिका आवश्यक अनुमति और लाइसेंस जारी करेगा।
12. ईरान और अमेरिका अंतिम समझौते के सफल क्रियान्वयन और भविष्य में उसके पालन की निगरानी के लिए एक मैकेनिज्म स्थापित करेंगे।
13. इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और अनुच्छेद 4, 5, 10 और 11 के लागू होने की गारंटी मिलने के बाद, दोनों देश केवल शेष बचे प्रावधानों पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू करेंगे।
14. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी।