पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद दुबई में आवासीय संपत्ति बाजार खरीदारों को आकर्षित कर रहा है। कुछ निवेशक कीमतों में हालिया नरमी को दूर रहने का कारण मानने के बजाय खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं। उद्योग जगत के अधिकारियों और प्रॉपर्टी कंसल्टेंट का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और निवेश गतिविधि थोड़ी धीमी हुई हैं। हालांकि उन्हें दुबई के आवासीय बाजार में कोई बड़ी गिरावट नहीं दिख रही।
इसके बजाय, वे चुनिंदा खरीदारों की ओर इशारा करते हैं जो बाजार में नरमी के बीच कम कीमत वाली संपत्तियों की तलाश कर रहे हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया में इंटरनैशनल पार्टनर और वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने इसके रियल एस्टेट बाजार में कुछ सतर्कता तो बढ़ाई है मगर इसका प्रभाव संरचनात्मक से ज्यादा भावना आधारित है। वैश्विक, पूंजी-समृद्ध निवेशकों से चुनिंदा दिलचस्पी दिख रही है जो वर्तमान में कीमतों में नरमी को प्रॉपर्टी में रणनीतिक निवेश के अवसर के रूप में देख रहे हैं।’
निसस फाइनैंस के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अमित गोयनका ने कहा कि बाजार एक साथ दो अलग-अलग रास्तों पर चल रहा है। निवेश गतिविधियां धीमी हुई हैं और और निवेशकों की संख्या घट गई है लेकिन धनाढ्य निवेशक बड़े डेवलपरों से कम कीमत पर तैयार और निर्माणाधीन परियोजनाओं में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया संघर्ष के चरम पर निवेशक गतिविधि में भारी गिरावट आई और दुबई के डीएफएम रियल एस्टेट इंडेक्स में पांच सत्रों में 20 फीसदी की गिरावट आई, जिससे इस साल की अब तक की इसकी सारी बढ़त खत्म हो गई। प्रॉपर्टी के दाम 12 से 15 फीसदी कम हो गए हैं।’
एनारॉक में चैनल पार्टनर्स के सीईओ और पश्चिम एशिया में रेजिडेंशियल बिज़नेस के सीईओ आयुष पुरी ने कहा कि दुबई में सतर्क और मौके का फायदा उठाने वाले, दोनों तरह की निवेश गतिविधियां देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘अच्छे अवसर की तलाश करने वाले एशिया और यूरोप के निवेशक निश्चित रूप से विशिष्ट परियोजनाओं में कीमतों में कटौती की संभावना से आकर्षित हो रहे हैं और रणनीतिक प्रवेश के विकल्प के लिए मौजूदा हालात का अध्ययन कर रहे हैं।’
उद्योग के अधिकारियों ने क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद निवेशकों को आकर्षित करने वाले कई कारकों का उल्लेख किया। गोयनका के अनुसार दुबई में किराये में 5 से 9 फीसदी का शुद्ध रिटर्न मिलता है जिस पर आयकर शून्य होता है जबकि दिरहम-डॉलर में स्थिरता विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा के उतार-चढ़ाव की चिंता से बचाता है। उन्होंने दुबई के 2 वर्षीय रियल एस्टेट निवेशक वीजा के लिए पात्रता आवश्यकताओं में ढील देने का भी उल्लेख किया और कहा कि संकटग्रस्त विक्रेता ऐसे प्रवेश बिंदु बना रहे हैं जो एक साल पहले मौजूद नहीं थे।
पुरी ने कहा कि दुबई का कर-मुक्त वातावरण, गोल्डन वीजा कार्यक्रम और निर्दिष्ट क्षेत्रों में 100 फीसदी विदेशी स्वामित्व निवेशकों को लुभा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘मुद्रा विनिमय प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए भी आकर्षक है।