दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से नीचे फिसलकर 78.94 डॉलर पर आ गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 76.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौता है। 19 जून को दोनों देशों के बीच एक बड़े समझौते की उम्मीद जताई जा रही है। बाजार को लग रहा है कि अगर यह समझौता हो गया तो पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा और तेल की सप्लाई बढ़ सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस संभावित समझौते को “ऐतिहासिक” बताया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी पाबंदियां हटाई जा सकती हैं और नौसैनिक रुकावटें भी खत्म हो सकती हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल की सप्लाई करता है। जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, तेल की कीमतें ऊपर चली जाती हैं। लेकिन अब सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद से कीमतों पर दबाव बना है।
पिछले कुछ महीनों से ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल महंगा बना हुआ था। निवेशक सप्लाई में रुकावट की आशंका से चिंतित थे। अब समझौते की उम्मीद बढ़ने के साथ यह डर कम होता दिख रहा है।
तेल की कीमतों में गिरावट के बीच वैश्विक शेयर बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। अमेरिका में टेक शेयरों पर दबाव दिखा। नैस्डैक 100 में 1.89 फीसदी और नैस्डैक में 1.15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं एसएंडपी 500 भी 0.57 फीसदी नीचे रहा। दूसरी तरफ डॉव जोंस इंडेक्स 0.64 फीसदी चढ़ गया।
यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में हल्की बढ़त देखने को मिली। फ्रांस का CAC 40 इंडेक्स 0.75 फीसदी, ब्रिटेन का FTSE 100 इंडेक्स 0.61 फीसदी और जर्मनी का DAX इंडेक्स 0.07 फीसदी ऊपर बंद हुआ।