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‘राज्यों के अधिकार नहीं छीने’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्टालिन के आरोपों को नकारा

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फसलों पर बोनस देने को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार में वाकयुद्ध छिड़ गया है। वित्त मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय हित में केवल एक सलाह करार दिया है

Last Updated- April 12, 2026 | 10:38 PM IST
FM Nirmala Sitharaman
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण | फाइल फोटो

वित्त मंत्रालय ने रविवार को कहा कि राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे गए पत्र में व्यय विभाग ने दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को प्रोत्साहन देने के हिसाब से बोनस नीति बनाने का अनुरोध किया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस एडवाइज़री को ‘किसानों के खिलाफ एक विश्वासघाती कृत्य’ बताया था, जिसे देखते हुए यह बयान जारी किया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी तथ्यात्मक रूप से बेबुनियाद, राजनीतिक रूप से प्रेरित और तमिलनाडु के किसानों को गुमराह करने के लिए जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का एक प्रयास है।

सीतारमण ने कहा, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा करना, हमेशा से राज्य सरकारों का ही विशेषाधिकार रहा है और आज भी है। किसी ने भी उनसे यह अधिकार नहीं छीना है। मुख्यमंत्री स्टालिन सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और राष्ट्रीय हित में काम करने के बजाय संकीर्ण और स्वार्थी राजनीतिक हितों को साधने के लिए जानबूझकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।’ 

वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘यह पत्र इस मकसद से लिखा गया था कि राज्य सरकारें अपनी नीतियां व्यापक राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप तैयार करें और उनका अनुपालन करें। इस तरह के लक्ष्यों के साथ तालमेल करना राज्यों पर बोझ नहीं है। किसानों, ग्राहकों और कुल मिलाकर देश की सेवा करना दोनों का मिला जुला दायित्व है।’

स्टालिन ने कहा था कि डीएमके धान के किसानों का प्रोत्साहन रोकने की भाजपा और एआईएडीएमके की किसी भी कोशिश को नाकाम कर  देगी और किसानों को उचित मूल्य मिलना सुनिश्चित करती रहेगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि व्यय विभाग के सचिव द्वारा 9 जनवरी, 2026 को जारी पत्र, ‘भारत की दीर्घकालिक खाद्य और फसल सुरक्षा को मज़बूत करने के उद्देश्य से अपनाए गए एक रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण’ को दर्शाता है।  सरकार ने राष्ट्रीय हित और किसानों के हित तथा देश की खाद्य सुरक्षा की जरूरतों सहित सभी पक्षों के हितों की रक्षा के लिए फसलों की विविधता को बढ़ावा देकर दूरदर्शी रुख अपनाया है।’इसमें कहा गया है, ‘पूरे भारत में राज्यों और किसानों की दालों और तिलहनों की खेती की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है। इस पत्र का उद्देश्य इसी ताकत का लाभ उठाना है।’

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First Published - April 12, 2026 | 10:38 PM IST

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