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Sugar Export: प्रतिबंध के बावजूद अमेरिका को 8,606 टन चीनी निर्यात करेगा भारत

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टीआरओ योजना के तहत एक अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक अमेरिका को निर्यात की जाने वाली 8,606 मीट्रिक टन कच्ची गन्ने की चीनी की मात्रा घोषित की गई है

Last Updated- May 25, 2026 | 8:35 PM IST
Sugar

Sugar Export: भारत सरकार ने अमेरिका को 8,606 टन कच्ची गन्ने की चीनी के निर्यात की मंजूरी दी है। अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक कोटा-आधारित टैरिफ रियायत (टीआरओ) योजना के तहत इस निर्यात को अनुमति दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी करके यह जानकारी दी है।

टीआओ योजना के तहत होगा निर्यात

अधिसूचना में में कहा है गया कि टीआरओ योजना के तहत एक अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक अमेरिका को निर्यात की जाने वाली 8,606 मीट्रिक टन कच्ची गन्ने की चीनी की मात्रा घोषित की गई है। विदेश व्यापार नीति 2023 के अनुच्छेद 2.04 के तहत जारी इस सूचना के अनुसार, भारत अमेरिका और यूरोपीय संघ को चीनी (HS कोड 17010000) का निर्यात TRQ योजना के तहत बिना किसी प्रतिबंध के जारी रख सकता है। यह छूट पुरानी अधिसूचना संख्या 3/2015-20 (दिनांक 20 अप्रैल 2015) के नियमों के अनुसार ही लागू रहेगी।

चीनी के निर्यात को लेकर अमेरिका में निर्यात के लिए मूल प्रमाण पत्र (Certificate of Origin) की जरूरत पड़े, तो उसे अतिरिक्त डीजीएफटी, मुंबई द्वारा APEDA (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) की सिफारिश के आधार पर जारी किया जाएगा। यह सर्टिफिकेट APEDA की सिफारिशों के आधार पर पात्र निर्यातकों और निर्धारित मात्रा के अनुसार दिया जाएगा।

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30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर प्रतिबंध

घरेलू सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के प्रयास में, भारत ने इस साल 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। घरेलू आपूर्ति और कीमत को स्थिर रखने और स्टॉक को मजबूत बनाने के लिए भारत ने चीनी के निर्यात को रोका है। लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते के कारण प्रतिबंध मुक्त चीनी का निर्यात किया जा रहा है। इसी टीआरओ कोटा के तहत भारत 8,606 टन कच्ची चीनी अमेरिका को निर्यात करेगा।

निर्यात में गिरावट

पिछले दो सालों में भारत का चीनी निर्यात कुल उत्पादन के 5 फीसदी से भी कम रह गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं। ये कदम चीनी के कम उत्पादन और गन्ने के रस का अधिक इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में होने की वजह से उठाए गए हैं। ये फैसले महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में गन्ने का कम उत्पादन और वैश्विक अनिश्चितता के कारण लिए गए हैं।

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी बाजार

भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी बाजारों में से एक बना हुआ है, और उम्मीद है कि 2025-26 में घरेलू खपत लगभग 28 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी। यह देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक भी है। वैश्विक चीनी उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 20 फीसदी और दुनिया भर की खपत में लगभग 15 फीसदी है, जिससे इसके उत्पादन और व्यापार से जुड़े फैसले अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर गहरा असर डालते हैं।

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First Published - May 25, 2026 | 8:35 PM IST

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