facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

ड्राफ्ट IT नियमों से सोशल मीडिया पर बढ़ेगा सरकारी कंट्रोल; YT, FB, Insta पर क्या होगा असर?

Advertisement

सरकार को यूजर्स को सीधे टेकडाउन नोटिस देने का अधिकार; डिजिटल अधिकार समूहों ने जताई चिंता

Last Updated- March 31, 2026 | 3:41 PM IST
Representational Image

केंद्र सरकार ने सोमवार को प्रस्ताव रखा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को सीधे व्यक्तिगत यूजर्स को कंटेंट हटाने (टेकडाउन) के नोटिस जारी करने की अनुमति दी जाए, जिससे सोशल मीडिया कंटेंट पर निगरानी का दायरा बढ़ जाएगा।

यह प्रस्ताव सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में संशोधन के ड्राफ्ट का हिस्सा है। इसका मकसद यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र समाचार और सामान्य मामलों से जुड़े कंटेंट क्रिएटर्स को आईटी नियमों के दायरे में लाना है।

अगर यह बदलाव लागू होते हैं, तो मंत्रालय को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट को ब्लॉक करने या यूजर्स को नियमों के उल्लंघन वाले कंटेंट में बदलाव करने के निर्देश देने का अधिकार मिल जाएगा। मौजूदा नियमों के तहत मंत्रालय केवल ऑनलाइन न्यूज प्लेटफॉर्म को ही ऐसे नोटिस जारी कर सकता है।

प्रस्ताव में क्या-क्या है?

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को जारी की गई सभी सलाहों (एडवाइजरी) का पालन करना अनिवार्य होगा। ये एडवाइजरी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत “सेफ हार्बर” सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी ड्यू डिलिजेंस का हिस्सा होंगी।

मंत्रालय ने कहा, ये संशोधन स्पष्टता और प्रक्रियात्मक सुधार के लिए हैं, ताकि मंत्रालय के निर्देशों को लागू करना आसान हो और खासकर समाचार व सामयिक मामलों से जुड़े कंटेंट पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा, प्रस्ताव में इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) के दायरे और कार्यक्षमता को बढ़ाने की बात कही गई है, ताकि वह सिर्फ शिकायतों ही नहीं बल्कि मंत्रालय की ओर से रेफर्ड मामलों पर भी विचार कर सके।

क्यों है अहम?

डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने इन प्रस्तावों पर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि ये बदलाव ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर कार्यपालिका के नियंत्रण को खतरनाक तरीके से बढ़ा सकते हैं।

IFF के अनुसार, नए संशोधन से यूजर की ओर से बनाए गए समाचार और सामयिक कंटेंट भी IDC के दायरे में आ जाएंगे, जिससे निगरानी और बढ़ेगी।

संगठन ने यह भी कहा कि अगर इंटरमीडियरी किसी सरकारी निर्देश का पालन नहीं करते, तो वे अपनी “सेफ हार्बर” सुरक्षा खो सकते हैं, जिससे कंपनियां जरूरत से ज्यादा कंटेंट हटाने और सेंसरशिप करने लगेंगी।

IFF ने कहा कि ये संशोधन ऐसे समय में आए हैं जब ऑनलाइन राजनीतिक अभिव्यक्ति, व्यंग्य और आलोचना पर पहले से ही दबाव बढ़ रहा है।

हाल के बदलाव भी चर्चा में

हाल ही में सरकार ने टेकडाउन नोटिस के पालन की समय सीमा 24-36 घंटे से घटाकर 2-3 घंटे कर दी है। इसके बाद से सोशल मीडिया कंपनियां ज्यादा तेजी से पोस्ट और अकाउंट हटा रही हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के हफ्तों में कई पोस्ट हटाए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री से जुड़े एनीमेशन, सरकार की आलोचना वाले पोस्ट और एआई से बने व्यंग्यात्मक वीडियो शामिल हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य “एआई जेनरेटेड डीपफेक” और “फेक न्यूज” पर रोक लगाना है।

Advertisement
First Published - March 31, 2026 | 3:41 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement