अनिल अग्रवाल की अगुआई वाले वेदांत समूह ने आरोप लगाया है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए लेनदारों की समिति ने एक दोषपूर्ण और अपारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई, जिससे दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत मूल्य को अधिकतम करने की प्रक्रिया कमजोर हुई।
नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के समक्ष अपनी दलीलों में वेदांत ने तर्क दिया कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी समूह की समाधान योजना को मंजूरी देने से विपरीत परिणाम सामने आए, जिससे कम मूल्य वाली बोलियों को (उसकी अपनी बोली सहित) काफी अधिक मूल्य वाली बोलियों से ऊपर रखा गया।
आईबीसी के तहत लेनदारों की समिति फैसला लेने वाली सबसे बड़ी निकाय होती है। धातु और खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि निर्धारित मानदंडों के आधार पर हुई चुनौती प्रक्रिया के दौरान वह सबसे बड़ी बोली लगाने वाली के रूप में उभरी थी, लेकिन अंतिम मूल्यांकन में उन परिणामों की झलक नहीं मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि उस रूपरेखा से भटकाव हुआ है, जिसके आधार पर बोलियां आमंत्रित की गई थीं और उनमें सुधार किया गया था। सीओसी की स्कोरिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए वेदांत ने कहा कि घोषित मूल्यांकन मापदंडों और दिए गए अंतिम अंकों के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं था।
वेदांता ने एनसीएलएटी के समक्ष इस फैसले को चुनौती दी थी और समाधान योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया। इसके बाद इस मामले को वापस एनसीएलएटी भेज दिया गया।