facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

जेपी एसोसिएट्स मामले में वेदांत का आरोप: मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, NCLAT में दी चुनौती

Advertisement

वेदांता ने एनसीएलएटी के समक्ष इस फैसले को चुनौती दी थी और समाधान योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया

Last Updated- April 16, 2026 | 10:54 PM IST
Vedanta Demerger

अनिल अग्रवाल की अगुआई वाले वेदांत समूह ने आरोप लगाया है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए लेनदारों की समिति ने एक दोषपूर्ण और अपारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई, जिससे दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत मूल्य को अधिकतम करने की प्रक्रिया कमजोर हुई।

नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के समक्ष अपनी दलीलों में वेदांत ने तर्क दिया कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी समूह की समाधान योजना को मंजूरी देने से विपरीत परिणाम सामने आए, जिससे कम मूल्य वाली बोलियों को (उसकी अपनी बोली सहित) काफी अधिक मूल्य वाली बोलियों से ऊपर रखा गया।

आईबीसी के तहत लेनदारों की समिति फैसला लेने वाली सबसे बड़ी निकाय होती है। धातु और खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि निर्धारित मानदंडों के आधार पर हुई चुनौती प्रक्रिया के दौरान वह सबसे बड़ी बोली लगाने वाली के रूप में उभरी थी, लेकिन अंतिम मूल्यांकन में उन परिणामों की झलक नहीं मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि उस रूपरेखा से भटकाव हुआ है, जिसके आधार पर बोलियां आमंत्रित की गई थीं और उनमें सुधार किया गया था। सीओसी की स्कोरिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए वेदांत ने कहा कि घोषित मूल्यांकन मापदंडों और दिए गए अंतिम अंकों के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं था।

वेदांता ने एनसीएलएटी के समक्ष इस फैसले को चुनौती दी थी और समाधान योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का भी रुख किया। इसके बाद इस मामले को वापस एनसीएलएटी भेज दिया गया।

Advertisement
First Published - April 16, 2026 | 10:51 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement