प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने जनवरी-मार्च तिमाही (वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही) में जमा प्रमाणपत्रों (सीडी) से 5.27 लाख करोड़ रुपये जुटाए। बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बीती तिमाही और सालाना आधार दोनों पर ही सीडी से 30 प्रतिशत से अधिक राशि जुटाई। वित्त वर्ष 26 में कुल 14 लाख करोड़ रुपये के सीडी जारी किए गए।
मार्च में अकेले 2.14 लाख करोड़ जारी किए थे और यह नकदी की तंगी के दौर में बैंकों की अल्पकालिक तरीकों पर बढ़ती निर्भरता दर्शाती है। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक के नकदी डालने के बावजूद बैंकिंग प्रणाली इसकी तंगी का सामना कर रही है। जमा राशि जुटाने की तुलना में ऋण वृद्धि की तेज गति के कारण बही-खाते में असंतुलन भी पैदा हुआ। इसे बॉन्ड जारी करने से कुछ हद तक कम करने में मदद मिली। रिजर्व बैंक के अनुसार मार्च, 2026 की समाप्ति पर बकाया सीडी बढ़कर 6.93 लाख करोड़ रुपये हो गई जबकि यह एक साल पहले 5.22 लाख करोड़ रुपये थी। लिहाजा इसमें करीब 33 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
निजी बैंक के अधिकारी ने बताया, ‘यह बेहद स्पष्ट है कि कई बैंकों ने जमा राशि जुटाने के लिए सीडी का इस्तेमाल किया। मार्च में सीडी की दरें विशेषरूप से अधिक थीं, यह विशेषतौर पर 7.25-7.60 प्रतिशत के दायरे में थीं।’ कुछ अपवादों को छोड़कर—जहां कुछ सीडी की ब्याज दरें 8 प्रतिशत तक भी थीं—इन उच्च दरों पर बड़ी मात्रा में सीडी जारी की गईं।
सभी अवधियों की ब्याज दरें लगभग स्थिर रहीं। एक समय पर 3 महीने, 6 महीने और 12 महीने की सीडी की ब्याज दरें लगभग समान थीं। हालांकि, अप्रैल में सीडी की ब्याज दरों में कमी आई है, खासकर 3 महीने की अवधि की सीडी की।