प्रतीकात्मक तस्वीर
भारत का माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र लंबे समय से चली आ रही सुस्ती से उबरता दिख रहा है। माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूट नेटवर्क (एमएफआईए) की जारी नवीनतम तिमाही रिपोर्ट के अनुसार इसका ऋण पोर्टफोलियो सात तिमाहियों में पहली बार बढ़ा है और संपत्ति गुणवत्ता मार्च 2024 से पहले के स्तर पर वापस आ गई है।
उद्योग का सकल ऋण पोर्टफोलियो बीती तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष 26 की जनवरी मार्च तिमाही में 3 प्रतिशत से अधिक बढ़ा और सात तिमाहियों से जारी गिरावट का दौर खत्म हुआ।
इसके साथ ही 31-180 दिनों के लिए ‘पोर्टफोलियो ऐट रिस्क’ (पीएआर) एक साल पहले के 6.3 प्रतिशत से तेजी से घटकर 2 प्रतिशत हो गया जबकि तिमाही ऋण वितरण बढ़कर 77,524 करोड़ रुपये हो गया। इस तिमाही में ऋण वितरण बीती सात तिमाहियों में सबसे ज्यादा था।
एमएफआईएन के सीईओ व निदेशक आलोक मिश्रा ने कहा, ‘अब हम कह सकते हैं कि अब मुश्किल दो सालों के बावजूद उद्योग बेहतर स्थिति की ओर बढ़ रहा है।’ उन्होंने पोर्टफोलियो में वृद्धि और ऋण चूक के स्तर में लगातार सुधार का हवाला दिया। तिमाही के दौरान ऋण गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ।