प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
कई गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के ऋण पोर्टफोलियो की देनदारियों में चूक के बढ़ने के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने और कच्चे माल की लागत बढ़ने कारण इस क्षेत्र पर दबाव बढ़ने की वजह से ऐसा हो रहा है।
उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि यह धारणा दिख रही है, लेकिन अभी संपत्ति की गुणवत्ता में तेज गिरावट के संकेत नहीं मिल रहे हैं, लेकिन इस पर नजर रखने की जरूरत है।
एक एनबीएफसी के अधिकारी ने कहा, ‘इस स्तर पर संपत्ति की गुणवत्ता को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन यह शुरुआती चेतावनी का संकेत है। अगर भूराजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहती हैं, तो चूक का जोखिम और भी बढ़ सकता है।’
एनबीएफसी अंडरराइटिंग मानकों को सख्त कर रही हैं और चूक की संभावना वाले खातों की निगरानी के लिए कदम उठा रही हैं। उद्योग के साझेदारों को उम्मीद है कि आगे चलकर ऋण की लागत बढ़ेगी और एमएसएमई में दबाव वाले सेक्टरों में ऋण देने को लेकर चयनात्मक रुख बढ़ेगा।
दबाव के शुरुआती संकेत 30 दिन के बकाया (डीपीडी) की श्रेणी में ज्यादा मिल रहे हैं। सामान्यतया इसे संपत्ति की गुणवत्ता पर दबाव का प्रमुख संकेतक माना जाता है। एक अन्य वरिष्ठ एनबीएफसी अधिकारी ने कहा, ‘खासकर 30 डीपीडी श्रेणी में शुरुआती स्तर की चूक बढ़ती हुई नजर आ रही है। इससे एमएसएमई पोर्टफोलियो पर दबाव बनने के संकेत मिल रहे हैं।’
अधिकारियों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ी इनपुट लागत के कारण इस तरह की स्थिति बनी है।
उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतों और कच्चे माल के दाम में उतार चढ़ाव से उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे एमएसएमई का मुनाफा कम हुआ है।’ उन्होंने कहा कि कुछ सेक्टरों में इनपुट लागत 25 से 75 प्रतिशत तक बढ़ी है।
ईंधन की कमी, श्रमिकों की कमी और उत्पादन में सुस्ती सहित औद्योगिक क्लस्टरों में आई कई बाधाओं के कारण परिचालन पर असर पड़ा है। इन चुनौतियों के कारण कुछ क्षेत्रों में कामकाज बंद करना पड़ा है। नोमुरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक इनपुट की कमी के कारण तमिलनाडु में कुछ इलाकों में करीब 30 प्रतिशत एमएसएमई ने कामकाज बंद कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एमएसएमई को कर्ज देने वाली एनबीएफसी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण वाहनों का परिचालन प्रभावित हुआ है और ऐसे में वाहनों को दिए गए ऋण पर असर पड़ा है।’
नगदी की आवक में कमी से भी भुगतान को लेकर दबाव बढ़ा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘बढ़ती लागत और बड़े खरीदारों द्वारा भुगतान में देरी के कारण नकदी की आवक पर असर पड़ा है और इससे पुनर्भुगतान की क्षमता प्रभावित हो रही है।’
वाहनों के कल पुर्जे और इंजीनियरिंग के सामान जैसे विनिर्माण क्षेत्र पर असर ज्यादा नजर आ रहा है। साथ ही निर्यात केंद्रित क्षेत्र जैसे टेक्सटाइल और गारमेंट भी वैश्विक मांग में कमी और लॉजिस्टिक्स व्यवधानों के कारण प्रभावित हुए हैं।