नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) ने अपनी क्रेडिट गारंटी योजना के तहत बड़े सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए ऋण सीमा को मार्च में अधिसूचित 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये कर दिया है। ऐसे संस्थानों में 2,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक प्रबंधन के अधीन संपत्ति (एयूएम) वाले एमएफआई शामिल हैं। सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना 2.0 (सीजीएसएमएफआई 2.0) की घोषणा मार्च में की गई थी।
वाणिज्यिक बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (एनबीएफसी-एमएफआई) और अन्य एमएफआई को ऋण देने के लिए गारंटी कवर प्रदान करने हेतु इसकी घोषणा की गई थी, ताकि छोटी उधारी लेने वालों को कर्ज दिया जा सके। इस योजना के तहत एनसीजीटीसी द्वारा 20,000 करोड़ रुपये ऋणों की गारंटी दी जानी थी। इस योजना के तहत ऋण वितरण अभी शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि सूक्ष्म ऋणदाताओं ने बड़े संस्थानों के लिए 300 करोड़ रुपये की सीमा को अपर्याप्त बताया था।
पिछले सप्ताह जारी एक अधिसूचना में केंद्र सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली एनसीजीटीसी ने बड़े एमएफआई के लिए स्वीकृत राशि को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है, जो संस्थान के एयूएम के 20 प्रतिशत की सीमा के अधीन है। इस योजना का उद्देश्य ऋणदाताओं के विश्वास को बहाल करना और विशेष रूप से छोटे और मझोले एमएफआई को मिलने वाले ऋण को बढ़ाना है। वित्त वर्ष 2024 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही और वित्त वर्ष 2026 की समान तिमाही के बीच इन संस्थानों को बैंक से मिलने वाले ऋण में 70 प्रतिशत की गिरावट आई थी।