प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के परिचालन का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसे विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली स्थिर ऋण मांग और उसके वितरण से बल मिलेगा। हालांकि उधारी की बढ़ती लागत से उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
एनबीएफसी के शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 14 से 15 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। यह बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई) खंड की समग्र लाभप्रदता में महत्वपूर्ण योगदान देगा। हालांकि पश्चिम एशिया में चल रही घटनाओं को देखते हुए खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को कर्ज देने वाले ऋणदाताओं को इस पोर्टफोलियो पर नजर रखनी होगी।
आईडीबीआई कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 12 से 13 प्रतिशत की मजबूत ऋण वृद्धि की संभावना है। इसे खुदरा, आवास, एनबीएफसी आधारित ऋण में निरंतर वृद्धि से समर्थन मिलेगा। इसमें एनबीएफसी की तेज ऋण वृद्धि बरकरार है और खासकर आवास ऋण में सालाना वृद्धि 20 प्रतिशत के करीब है। वहीं वाहन ऋण में भी तेजी नजर आ सकती है। साथ ही गोल्ड लोन देने वाले ऋणदाताओं के लिए भी यह एक और मजबूत तिमाही नजर आ सकती है।
इक्विरस सिक्योरिटीज ने भी यही बात दोहराई है कि व्यापक वित्तीय क्षेत्र में एनबीएफसी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कर के बाद लाभ (पीएटी) में तिमाही आधार पर 14 से15 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। इसकी वजह से एनबीएफसी इस तिमाही में बीएफएसआई की कमाई में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज ने कहा, ‘असुरक्षित खंडों, जिसमें व्यक्तिगत और व्यावसायिक ऋण शामिल हैं, में इस तिमाही के दौरान ऋण देने की रफ्तार तेज रही है। सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) ने भी तेजी से ऋण दिया है। इसकी वजह से 4-6 तिमाहियों के संकुचन के बाद प्रबंधन के तहत संपत्ति (एयूएम) बढ़ी है।’
मोतीलाल ओसवाल के अनुसार एनबीएफसी-एमएफआई की प्रबंधन के तहत संपत्ति (एयूएम) में क्रमिक आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसने कहा, ‘कुल मिलाकर एमएफआई कंपनियों की संपत्ति की गुणवत्ता और संग्रह की कुशलता बेहतर रही है और इसमें आगे किसी गिरावट की संभावना नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि एमएफआई की ऋण लागत में क्रमिक आधार पर गिरावट आएगी।’
इक्विरस ने विभिन्न क्षेत्रों में संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के रुझानों पर भी प्रकाश डाला है। उसने कहा कि एमएफआई सेगमेंट में तनाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, और बिहार के एमएफआई कानून का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। साथ ही संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
ब्याज दरों में पहले की कटौती के प्रभाव के साथ उधारी की लागत अभी भी अधिक रहने और नकदी की कमी की स्थिति के कारण ब्याज से शुद्ध आमदनी (एनआईएम) पर दबाव बने रहने की उम्मीद है। नीतिगत ढील के लाभों को बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने काफी हद तक संतुलित कर दिया है, जिससे उधार लेने की लागत मोटे तौर पर स्थिर बनी हुई है।
इक्रा में वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग के प्रमुख कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, ‘वृद्धि और एयूएम के मामले में आंकड़े बेहतर होने चाहिए। मार्जिन में कुछ संकुचन हो सकता है क्योंकि चौथी तिमाही में यील्ड ऊंची बनी हुई है, लेकिन उसके अलावा, हमें तिमाही के लिए कोई बड़ा नकारात्मक पहलू नहीं दिखता है।’उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही दिलचस्प होगी, क्योंकि ईरान के संघर्ष के 4 महीने हो चुके होंगे। अगले एक से दो महीनों में स्थितियां किस तरह रहती हैं, यह महत्त्वपूर्ण होगा।’