वित्त-बीमा

माइक्रोफाइनैंस सेक्टर में दबाव फिर बढ़ा, अप्रैल में शुरुआती डिफॉल्ट में इजाफा

परिसंपत्ति की गुणवत्ता में कुल मिलाकर सुधार हुआ है मगर कर्ज चुकाने का सिलसिला बेहतर होने के बाद भी कंपनियां मुश्किलों से बाहर नहीं आई हैं

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अनुप्रेक्षा जैन   
Last Updated- June 13, 2026 | 2:51 PM IST

भारत में छोटी रकम के कर्ज देने वाले माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र में दिक्कतें अप्रैल में एक बार फिर उभर आईं। हालांकि परिसंपत्ति की गुणवत्ता में कुल मिलाकर सुधार हुआ है मगर कर्ज चुकाने का सिलसिला बेहतर होने के बाद भी कंपनियां मुश्किलों से बाहर नहीं आई हैं।

सीआरआईएफ हाई मार्क की हालिया माइक्रोलेंड लाइट रिपोर्ट बताती है कि किस्त चुकाने में 1 से 30 दिन की देर वाले कर्ज का अनुपात मार्च में 0.6 प्रतिशत था, जो अप्रैल में बढ़कर 0.8 प्रतिशत हो गया। यह बढ़ोतरी तब हुई है, जब देर से किस्त वाले कर्ज का कुल स्तर घटा है। इससे पता चलता है कि इस क्षेत्र में अभी सब कुछ पटरी पर नहीं लौटा है।

रिपोर्ट के मुताबिक 1 से 180 दिन देर से चुकाए जाने वाले कर्ज का स्तर मार्च के 2.6 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 2.5 प्रतिशत रह गया। इसी तरह 31 से 90 दिन देर से चुकाए जा रहे कर्ज का अनुपात 0.8 प्रतिशत से घटकर 0.6 प्रतिशत और 91 से 180 दिन देर वाले कर्ज का अनुपात 1.2 प्रतिशत से घटकर 1.1 प्रतिशत रह गया।

अप्रैल में बैंकों के लिए 1 से 30 दिन देर वाले कर्ज का अनुपात सबसे तेज बढ़ा और मार्च के 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 1.1 प्रतिशत हो गया। लघु वित्त बैंकों में यह अनुपात 0.5 प्रतिशत से बढ़कर 0.7 प्रतिशत और एनबीएफसी-एमएफआई में 0.6 प्रतिशत से बढ़कर 0.7 प्रतिशत हो गया।

एनबीएफसी इस मामले में अपवाद रहे। उनका 1 से 30 दिन देर से चुकाया जाने वाला कर्ज मार्च के 0.6 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 0.4 प्रतिशत रह गया। ऐसे में एनबीएफसी ही इकलौती श्रेणी रही, जहां कम दिन की देर का अनुपात हुआ।

सीआरआईएफ हाई मार्क ने कहा कि एनबीएफसी को छोड़कर छोटे कर्ज देने वाली ज्यादातर संस्थाओं के 1 से 30 दिन देर से चुकाए जाने वाले कर्ज थोड़े बढ़ गए। इससे अधिक दिनों तक बकाया रहने वाले कर्ज का अनुपात कम हुआ।

माइक्रोफाइनैंस संस्थानों ने अप्रैल में नया कर्ज देने पर कुछ अंकुश लगाया। इसका मकसद तेजी से विस्तार करने के बजाय ऋण पोर्टफोलियो को बेहतर बनाए रखना था। सीआरआईएफ हाई मार्क डेटा के मुताबिक अप्रैल में केवल 20,239 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया, जो मार्च के 29,543 करोड़ रुपये से 31.5 प्रतिशत कम था। अप्रैल में बांटे गए कुल कर्ज की संख्या भी मार्च के 47.2 लाख से घटकर 32.5 लाख रह गई।

First Published : June 13, 2026 | 2:51 PM IST