वित्त-बीमा

बैंकिंग बोर्ड में महिलाएं: निजी बैंकों के मुकाबले पीछे सरकारी बैंक, 4 बैंकों में एक भी महिला सदस्य नहीं

भारतीय बैंकिंग बोर्डों में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 15% है, जिसमें सरकारी बैंक निजी बैंकों से पीछे हैं और वर्तमान में किसी भी बड़े बैंक की कमान महिला सीईओ के पास नहीं है

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आतिरा वारियर   
अंजलि कुमारी   
Last Updated- March 08, 2026 | 10:52 PM IST

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जब बिजनेस स्टैंडर्ड ने भारत में बैंकों और बीमा कंपनियों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के आंकड़ों पर गौर किया, तो आंकड़े निराशाजनक थे। भारतीय बैंकों के बोर्ड में केवल 15 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं। बीमा कंपनियों के बोर्ड में सदस्यों की संख्या बेहतर है, लेकिन फिर भी 20 प्रतिशत से कम हैं। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बोर्ड में महिला सदस्यों की संख्या, बोर्ड के कुल सदस्यों की संख्या का महज 10.6 प्रतिशत हैं। इनमें 4 बैंक ऐसे हैं, जहां बोर्ड में एक भी महिला नहीं है। निजी क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 17 प्रतिशत है।

भारतीय बैंकों में अब कोई महिला सीईओ नहीं है, चाहे वह निजी क्षेत्र हो या सार्वजनिक क्षेत्र। सूचीबद्ध लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) का प्रदर्शन कुछ सुधरा है। उनके बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी 16.9 प्रतिशत से थोड़ी अधिक थी। उज्जीवन एसएफबी के बोर्ड में सबसे ज्यादा 4 महिलाएं हैं। सूचीबद्ध बीमा कंपनियों के बोर्ड में 19.5 प्रतिशत महिला सदस्य हैं। तीन बीमा कंपनियों की सीईओ महिलाएं हैं।

First Published : March 8, 2026 | 10:52 PM IST