गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की कुल उधारी में बैंक ऋणों का हिस्सा वित्त वर्ष 2027 तक बढ़कर 44 से 45 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में यह हिस्सा 200 आधार अंकों बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान बैंक ऋण दरों में नरमी जारी रही। हालांकि बॉन्ड यील्ड पहली छमाही में गिरी, फिर दूसरी छमाही में थोड़ी बढ़ी और उच्च स्तर पर बनी हुई है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और इसके परिणामस्वरूप विनिमय दर की अस्थिरता के कारण बाहरी वाणिज्यिक उधारी का हिस्सा निकट भविष्य में सीमित रहने की संभावना है। प्रतिभूतीकरण संसाधन जुटाने में कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है। क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक मालविका भोटिका ने कहा, ‘अनिश्चित वृहद आर्थिक माहौल के कारण निकट भविष्य में सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड के उच्च बने रहने की उम्मीद है।
इसलिए इस वित्त वर्ष के शुरुआती हिस्से में कॉरपोरेट बॉन्ड की ब्याज दरें बैंक ऋण दरों से अधिक रहने की संभावना है। इसके परिणामस्वरूप एनबीएफसी की बैंक ऋण के प्रति प्राथमिकता बनी रहेगी। हम आधार मामले में उम्मीद करते हैं कि इस वित्त वर्ष में एनबीएफसी की कुल उधारी में बैंक से धन जुटाने का हिस्सा 100-200 आधार अंक बढ़ जाएगा।’ वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी छमाही में पूंजी बाजार से उधार लेने और बैंक ऋणों की सापेक्ष लागत के कारण अलग-अलग रुझान देखे गए।
जनवरी से जुलाई, 2025 के बीच बॉन्ड यील्ड में 80 आधार अंकों से अधिक की गिरावट आई जबकि बैंकों की भारित औसत ऋण दर में लगभग 50 आधार अंकों की गिरावट आई। हालांकि बाद में यील्ड में विपरीत रुख देखा गया और मार्च, 2026 तक ये जनवरी 2025 के स्तर से ऊपर चढ़ गईं जबकि ऋण दरें और गिर गईं।