Vedanta Demerger: वेदांता समूह के डिमर्जर के बाद बनी चार नई कंपनियों के शेयर सोमवार से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे। सूत्रों के अनुसार, यह वेदांता के पुनर्गठन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
पहले से सूचीबद्ध वेदांता लिमिटेड के अलावा अब वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड (VAML), वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड (VOGL), वेदांता पावर लिमिटेड और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (VISL) के शेयर भी निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे।
वेदांता के डिमर्जर प्रस्ताव को पिछले वर्ष दिसंबर में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मंजूरी मिली थी। मंजूर 1:1 डिमर्जर योजना के तहत वेदांता लिमिटेड के प्रत्येक एक शेयर के बदले निवेशकों को नई चारों कंपनियों का एक-एक शेयर आवंटित किया गया है।
चौथी तिमाही के नतीजों के बाद आयोजित निवेशकों की बैठक में वेदांता रिसोर्सेज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) देश्नी नायडू ने कहा था कि डिमर्जर के बाद समूह की नई इकाइयों में जून के मध्य तक ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी।
वेदांता का कहना है कि डिमर्जर के जरिए कंपनी का कॉरपोरेट ढांचा अधिक सरल और व्यवसाय-केंद्रित बनेगा। स्वतंत्र कंपनियों के रूप में काम करने से प्रत्येक इकाई अपने विकास लक्ष्यों और रणनीतियों पर बेहतर तरीके से फोकस कर सकेगी।
कंपनी के अनुसार, इस कदम से वैश्विक निवेशकों, संप्रभु संपत्ति कोषों, रणनीतिक निवेशकों और खुदरा निवेशकों को भारत की विकास गाथा से जुड़े विशिष्ट कारोबारों में सीधे निवेश करने का अवसर मिलेगा। साथ ही अलग-अलग व्यवसाय अपने ग्राहकों, निवेश चक्र और बाजार की जरूरतों के अनुरूप फैसले लेने में अधिक सक्षम होंगे।
यह पढ़ें: Vedanta demerger: 20 लाख शेयरधारकों को क्या होगा फायदा? समझें पूरा असर
डिमर्जर के बाद वेदांता समूह के अलग-अलग कारोबार नई कंपनियों के तहत संचालित होंगे। वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड के पास कंपनी का एल्युमिनियम कारोबार और भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) में उसकी हिस्सेदारी रहेगी। वहीं, वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के अंतर्गत केयर्न का तेल और गैस कारोबार आएगा।
इसके अलावा, वेदांता पावर लिमिटेड समूह की बिजली उत्पादन से जुड़ी परिसंपत्तियों का संचालन करेगी। वहीं वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड के पास आयरन ओर और स्टील कारोबार की जिम्मेदारी होगी।
15 जून को होने वाली लिस्टिंग पर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की खास नजर रहेगी। डिमर्जर के बाद पहली बार इन कारोबारों की अलग-अलग बाजार कीमत सामने आएगी, जिससे उनकी वास्तविक वैल्यू का अंदाजा लग सकेगा।