RBI New Rules for NRI-OCI Investors: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-निवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) के लिए शेयर बाजार में निवेश की सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही, यह सुविधा अब भारत के बाहर रहने वाले अन्य विदेशी व्यक्तियों (PROI) को भी दी जाएगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी।
यह कदम केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के बाद उठाया गया है। सरकार इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों (FEMA) में जरूरी बदलाव कर रही है।
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च हेड सौरभ जैन का कहना है कि RBI का यह फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा है। इससे विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है, बाजार में पैसे का प्रवाह बेहतर होगा और भारतीय शेयरों में लंबे समय के लिए ज्यादा निवेश आ सकता है। उन्होंने कहा कि यह कदम गिफ्ट सिटी जैसी पहलों के जरिए भारत को दुनिया के बड़े वित्तीय केंद्रों में शामिल करने की दिशा में मदद करेगा। दुनिया भर में रहने वाले भारतीयों और विदेशी निवेशकों के ज्यादा निवेश से बाजार मजबूत होगा, कंपनियों के लिए पैसा जुटाना आसान होगा और भारतीय वित्तीय बाजारों की वैश्विक पहुंच बढ़ेगी।
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इसके अलावा, RBI ने सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत 15, 30 और 40 साल की नई सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) को शामिल करने का फैसला किया है। इसके अलावा, सामान्य मार्ग (General Route) के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर लागू कुछ निवेश प्रतिबंध भी हटाए जाएंगे।
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम) कौस्तुभ गुप्ता ने कहा कि RBI ने महंगाई नियंत्रण और पूंजी फ्लो बढ़ाने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाए हैं। एक तरफ महंगाई को काबू में रखने के लिए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कुछ नए कदम उठाए हैं।
उनके अनुसार, FAR के दायरे को बढ़ाने और निवेश प्रतिबंधों में ढील देने से विदेशी निवेशकों की सरकारी बॉन्ड बाजार में भागीदारी बढ़ेगी। इससे सरकार के लिए उधार जुटाना आसान होगा और लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड की मांग भी बढ़ सकती है।
कौस्तुभ गुप्ता ने कहा कि ज्यादा सरकारी बॉन्ड विदेशी निवेश के लिए उपलब्ध होने और निवेश के नियम आसान बनने से बाजार में पैसों का फ्लो बढ़ेगा। इससे विदेशी निवेशकों की भारत के बॉन्ड बाजार में दिलचस्पी भी बढ़ सकती है और उनका निवेश लंबे समय तक बना रह सकता है।
उन्होंने कहा कि एनआरआई, ओसीआई और दूसरे विदेशी लोगों के लिए निवेश के नियम आसान बनाना भारत के लिए फायदेमंद कदम है। दुनिया भर में आर्थिक हालात लगातार बदल रहे हैं, ऐसे में यह फैसला भारत में ज्यादा विदेशी निवेश लाने और रुपये को मजबूती देने में मदद कर सकता है।