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CNG गाड़ियों की बाढ़, फिर भी गैस कंपनियों का मुनाफा क्यों डूब रहा है?

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CNG गाड़ियों की तेज मांग के बावजूद गैस कंपनियों के मार्जिन पर दबाव, ब्रोकरेज ने तीनों शेयरों पर HOLD बरकरार रखा

Last Updated- April 06, 2026 | 2:18 PM IST
CNG Price Hike

सड़क पर CNG गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, शोरूम से लेकर रजिस्ट्रेशन दफ्तर तक मांग मजबूत दिख रही है, लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक बड़ा दबाव भी छिपा है। एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की ताजा रिपोर्ट कहती है कि CNG वाहन भले तेजी से बढ़ रहे हों, पर City Gas Distribution कंपनियों के लिए यह बढ़त उतनी राहत लेकर नहीं आ रही, जितनी दिखती है। वजह यह है कि एक तरफ गैस महंगी होती जा रही है और दूसरी तरफ कंपनियां CNG के दाम खुलकर नहीं बढ़ा पा रहीं। ऐसे में बिक्री बढ़ने के बावजूद मुनाफा दबाव में है।

मार्च 2026 में CNG वाहनों की मांग रही मजबूत

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में CNG वाहनों की मांग मजबूत बनी रही। पूरे वित्त वर्ष 2026 में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL के यहां CNG वाहनों की संख्या 23.1 प्रतिशत बढ़ी। महानगर गैस लिमिटेड यानी MGL में यह बढ़त 7.7 प्रतिशत रही, जबकि गुजरात गैस में 15.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन तीनों में IGL सबसे आगे रही, खासकर दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में, जहां वृद्धि 25 प्रतिशत के करीब रही। बाकी क्षेत्रों में यह बढ़त 18 प्रतिशत रही। मार्च महीने में भी तीनों कंपनियों के यहां महीने दर महीने रजिस्ट्रेशन बढ़े और सालाना आधार पर भी अच्छी तेजी दिखाई दी।

IGL में प्राइवेट गाड़ियों और टैक्सी से मिला मजबूत सहारा

IGL के आंकड़े बताते हैं कि मार्च में कुल OEM CNG वाहन रजिस्ट्रेशन 18,538 यूनिट रहे। यह पिछले महीने से 4.5 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 39.9 प्रतिशत ज्यादा है। कुल CNG अपनाने की दर 32.5 प्रतिशत रही। प्राइवेट गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 10,031 यूनिट तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 44.5 प्रतिशत अधिक है। टैक्सी सेगमेंट में भी जबरदस्त तेजी रही और रजिस्ट्रेशन 3,943 यूनिट रहा। इस कैटेगरी में CNG अपनाने की दर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई। हल्के और मध्यम कमर्शियल वाहनों में भी CNG का इस्तेमाल बढ़ा, हालांकि कुछ कैटेगरी में अपनाने की दर में मामूली उतार चढ़ाव देखा गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 में IGL ने 2.02 लाख से ज्यादा CNG वाहन जोड़े, जो पिछले साल से 23.1 प्रतिशत अधिक है।

MGL में भी बढ़त, लेकिन रफ्तार IGL से कम

MGL के लिए मार्च का महीना बेहतर रहा, लेकिन इसकी रफ्तार IGL की तुलना में कुछ धीमी रही। कंपनी के यहां कुल रजिस्ट्रेशन 9,666 यूनिट रहे, जो महीने दर महीने 7.8 प्रतिशत और सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत बढ़े। कुल अपनाने की दर 40.5 प्रतिशत रही। प्राइवेट गाड़ियों में रजिस्ट्रेशन 3,943 यूनिट रहा, जबकि टैक्सी कैटेगरी में 2,739 यूनिट का रजिस्ट्रेशन हुआ। तीन पहिया वाहनों में भी CNG की मजबूत मौजूदगी बनी रही और इस वर्ग में अपनाने की दर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 में MGL ने करीब 1.01 लाख CNG वाहन जोड़े। यह पिछले साल से 7.7 प्रतिशत अधिक है।

अब MGL में पूरी तरह शामिल हो चुकी UEPL में भी मार्च के दौरान अच्छी बढ़त दिखाई दी। कुल रजिस्ट्रेशन 1,521 यूनिट रहे, जो महीने दर महीने 27.6 प्रतिशत और सालाना आधार पर 25.6 प्रतिशत बढ़े। प्राइवेट वाहनों में भी मजबूत मांग रही और तीन पहिया कैटेगरी में अपनाने की दर 71.9 प्रतिशत तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 में UEPL ने 14,400 CNG वाहन जोड़े, जो पिछले साल के मुकाबले 17.2 प्रतिशत ज्यादा है। यह संकेत देता है कि MGL के विस्तारित नेटवर्क में मांग बनी हुई है।

गुजरात गैस ने मार्च में दिखाई सबसे तेज मासिक छलांग

गुजरात गैस ने मार्च 2026 में सबसे तेज मासिक उछाल दिखाया। कंपनी के यहां कुल 22,237 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो पिछले महीने से 33.7 प्रतिशत और पिछले साल से 38.6 प्रतिशत ज्यादा है। कुल अपनाने की दर 30.9 प्रतिशत रही। प्राइवेट गाड़ियों में 14,764 यूनिट का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो बहुत मजबूत बढ़त को दिखाता है। तीन पहिया और टैक्सी कैटेगरी में भी सालाना आधार पर अच्छा विस्तार दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 में गुजरात गैस ने 1.86 लाख CNG वाहन जोड़े, जो पिछले साल से 15.4 प्रतिशत ज्यादा है। इससे साफ है कि मांग के मोर्चे पर कंपनी की पकड़ मजबूत बनी हुई है।

मांग बढ़ी, लेकिन मुनाफा क्यों नहीं बढ़ रहा

रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि CNG वाहनों की बढ़ती मांग अभी कंपनियों की कमाई में वैसी मजबूती नहीं ला पा रही है, जैसी उम्मीद की जा रही थी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पेट्रोल और डीजल पर सरकार की तरफ से एक्साइज कटौती की गई है, जिससे इन ईंधनों की खुदरा कीमतें अपेक्षाकृत नीचे बनी हुई हैं। दूसरी तरफ गैस की लागत लगातार बढ़ रही है। LNG की कीमत, स्पॉट LNG, Brent से जुड़ी गैस और दूसरी गैस लागतें ऊपर जा रही हैं। इसका सीधा असर CNG कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा है। कंपनियां चाहकर भी उतनी तेजी से CNG के दाम नहीं बढ़ा पा रहीं, क्योंकि ऐसा करने पर मांग पर असर पड़ सकता है।

मुंबई में CNG अब भी सबसे ज्यादा फायदेमंद

कीमत के मोर्चे पर मुंबई में CNG अभी भी पेट्रोल के मुकाबले सबसे ज्यादा बचत देती है। रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में CNG, पेट्रोल से 21.7 प्रतिशत और डीजल से 10 प्रतिशत सस्ती है। दिल्ली में यह छूट पेट्रोल के मुकाबले 18.7 प्रतिशत और डीजल के मुकाबले 12.1 प्रतिशत है। गुजरात गैस के इलाकों में CNG, पेट्रोल से 15.1 प्रतिशत और डीजल से 11.1 प्रतिशत सस्ती है। यही वजह है कि उपभोक्ता स्तर पर CNG की मांग बनी हुई है। हालांकि कंपनियों के लिए यह राहत पूरी नहीं है, क्योंकि लागत की मार कहीं ज्यादा गहरी है।

मार्च और तिमाही दोनों में मार्जिन पर चोट

एंटीक की रिपोर्ट कहती है कि मार्च में EBITDA प्रति scm के स्तर पर IGL और MGL के मार्जिन में 1.5 से 1.8 रुपये तक की गिरावट आ सकती है। गुजरात गैस के लिए गिरावट और ज्यादा, करीब 5.5 से 6 रुपये प्रति scm तक हो सकती है। इसकी वजह यह है कि गुजरात गैस की निर्भरता स्पॉट LNG और Brent से जुड़ी गैस पर ज्यादा है। चौथी तिमाही यानी 4QFY26 में भी मार्जिन में गिरावट का अनुमान है। IGL के लिए EBITDA प्रति scm 5.2 रुपये, MGL के लिए 6.3 रुपये और गुजरात गैस के लिए सिर्फ 2.1 रुपये रहने का अनुमान जताया गया है। इसका मतलब यह है कि बिक्री बढ़ने के बावजूद कमाई की गुणवत्ता कमजोर पड़ रही है।

आगे भी जल्दी राहत के आसार कम

रिपोर्ट का नजरिया आगे के लिए भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। ब्रोकरेज का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें अगले दो साल तक पहले के अनुमान से कम से कम 5 डॉलर प्रति बैरल ऊंची रह सकती हैं। साथ ही LNG की कीमतों में नरमी आने में भी देर हो सकती है, क्योंकि सप्लाई में रुकावटें बनी हुई हैं। दूसरी बड़ी चिंता APM गैस की सप्लाई है, जिसे FY28-29 तक चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाना है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि अप्रैल 2026 में APM आवंटन में और कटौती हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो कंपनियों की स्थिर कमाई की क्षमता प्रबंधन के पुराने अनुमान से 10 से 15 प्रतिशत नीचे रह सकती है।

सेक्टर पर ब्रोकरेज का रुख अब भी सतर्क

रिपोर्ट के मुताबिक बड़े शहरों में CNG प्राइवेट गाड़ियों का इस्तेमाल अब काफी हद तक परिपक्व स्तर पर पहुंच चुका है। आगे की बड़ी ग्रोथ के लिए हल्के कमर्शियल वाहनों में ज्यादा बदलाव जरूरी होगा, लेकिन वहां भी मजबूत आर्थिक फायदा दिखना चाहिए। जब एक साथ वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन दोनों दबाव में हों, तब सेक्टर का जोखिम बढ़ जाता है। यही वजह है that एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज ने CGD सेक्टर पर अपना रुख सतर्क रखा है।

ब्रोकरेज का कहना है कि IGL, MGL और गुजरात गैस के शेयरों में पहले ही 15 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की आम उम्मीदें अभी भी लंबी अवधि के मार्जिन को लेकर काफी आशावादी हैं। एंटीक को लगता है कि यह उम्मीदें ज्यादा मजबूत हैं और जमीन पर हालात उतने अनुकूल नहीं हैं। इसी वजह से उसने IGL, MGL और गुजरात गैस तीनों शेयरों पर HOLD की सलाह बरकरार रखी है।

 

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - April 6, 2026 | 1:09 PM IST

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