मार्च में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर होटल इंडस्ट्री पर भी देखने को मिला था। कई लोगों ने अपनी ट्रैवल प्लानिंग टाल दी थी, जिसकी वजह से होटल कारोबार थोड़ा सुस्त पड़ गया था। लेकिन अप्रैल में हालात काफी हद तक संभलते नजर आए। लोगों ने फिर से यात्रा शुरू की और होटलों में बुकिंग बढ़ने लगी।
एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में देश के बड़े होटलों में कमरों की ऑक्यूपेंसी 65 से 67 फीसदी के बीच रही। यानी हर 100 कमरों में से करीब 65 से 67 कमरे भरे रहे। वहीं होटल के कमरों का किराया भी पिछले साल के मुकाबले 5 से 7 फीसदी बढ़ा और औसतन 8,500 से 8,700 रुपये प्रति रात तक पहुंच गया। इसका सीधा फायदा होटल कंपनियों की कमाई पर पड़ा। प्रति कमरे से होने वाली आय यानी RevPAR में 7 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट में एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों में कटौती की वजह से अब ज्यादा भारतीय विदेश जाने के बजाय देश के भीतर ही घूमना पसंद कर रहे हैं।
यानी जो लोग पहले दुबई, थाईलैंड या दूसरे विदेशी पर्यटन स्थलों का रुख करते थे, उनमें से कई अब गोवा, जयपुर, केरल, हिमाचल और दूसरे घरेलू पर्यटन स्थलों की ओर जा रहे हैं। यही वजह है कि इस समय होटल इंडस्ट्री की मांग मुख्य रूप से घरेलू पर्यटकों के दम पर बनी हुई है।
वहीं विदेशी पर्यटकों की संख्या में सुधार जरूर हो रहा है, लेकिन उसकी रफ्तार अभी भी धीमी है।
देश के लगभग सभी बड़े शहरों में होटल के कमरों का किराया बढ़ा है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी गोवा, बेंगलुरु और अहमदाबाद में देखने को मिली, जहां होटल रेट 9 से 12 फीसदी तक बढ़ गए। मुंबई में भी होटल रेट 6 से 9 फीसदी तक बढ़े, जबकि चेन्नई, दिल्ली और हैदराबाद में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।
अगर ऑक्यूपेंसी की बात करें तो मुंबई और दिल्ली सबसे आगे रहे। यहां होटल के 77 से 81 फीसदी कमरे भरे रहे। वहीं अहमदाबाद में सबसे ज्यादा सुधार देखने को मिला, जहां बिजनेस गतिविधियों और बड़े आयोजनों की वजह से बुकिंग तेजी से बढ़ी।
अब होटल कंपनियां सिर्फ बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। रिपोर्ट के मुताबिक, नए होटल प्रोजेक्ट्स का बड़ा हिस्सा टियर-3 और टियर-4 शहरों में जा रहा है। यानी आने वाले समय में छोटे शहरों में भी बड़े होटल ब्रांड्स की मौजूदगी बढ़ सकती है। वहीं नए होटल खुलने का काम ज्यादा तर टियर-2 शहरों में हो रहा है।
इंडियन होटल्स कंपनी यानी IHCL का कहना है कि अप्रैल की शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन महीने के दूसरे हिस्से में मांग तेजी से बढ़ी। कंपनी को उम्मीद है कि इस तिमाही में उसकी कमाई 12 फीसदी से ज्यादा बढ़ सकती है। चैलेट होटल्स के मुताबिक अप्रैल अच्छा रहा और मई उससे भी बेहतर रहा। कंपनी को जून में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
लीला होटल्स का कहना है कि घरेलू यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अब कंपनी के कुल कारोबार में घरेलू यात्रियों की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी हो गई है।
वहीं SAMHI Hotels का कहना है कि अप्रैल में कारोबार सामान्य रहा, लेकिन मई में मांग काफी मजबूत हो गई। कंपनी को विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी कुछ सुधार दिखाई दिया है।
| कंपनी | CMP (रुपये) | रेटिंग | टारगेट प्राइस (रुपये) | संभावित अपसाइड |
|---|---|---|---|---|
| Indian Hotels Company (IHCL) | 667 | HOLD | 700 | 5% |
| Chalet Hotels | 759 | BUY | 1,150 | 52% |
| SAMHI Hotels | 161 | BUY | 230 | 43% |
ब्रोकरेज की पसंद की बात करें तो एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग को इस सेक्टर में Chalet Hotels और SAMHI Hotels सबसे ज्यादा पसंद हैं। ब्रोकरेज ने Chalet Hotels पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,150 रुपये का टारगेट रखा है, जो मौजूदा भाव 759 रुपये से काफी ऊपर है। वहीं SAMHI Hotels के लिए 230 रुपये का टारगेट दिया गया है, जबकि शेयर फिलहाल 161 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। दूसरी तरफ Indian Hotels Company (IHCL) पर ब्रोकरेज ने ‘HOLD’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट 700 रुपये रखा है। फिलहाल IHCL का शेयर करीब 667 रुपये पर कारोबार कर रहा है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)