अल-नीनो के बढ़ते खतरे ने मॉनसून सीजन के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं। लगातार दो साल ला-नीना जैसे अनुकूल मॉनसून सीजन के बाद अब मौसम चक्र में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 मॉनसून के लिए अल-नीनो (El Nino) का जोखिम बढ़ रहा है, जिससे भारत में बारिश, खेती, ग्रामीण मांग और कई सेक्टरों पर दबाव बन सकता है। रिपोर्ट का साफ संकेत है कि अगर अल-नीनो और मजबूत होता है, तो इसका असर सबसे पहले कृषि, एग्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर कंपनियों और ग्रामीण खपत से जुड़ी कंपनियों पर दिख सकता है। इससे इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश का अवसर हो सकता है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की कृषि सेक्टर पर जारी नई रिपोर्ट में कहा गया है कि FY24 और FY25 में ला-नीना के असर से भारत को सामान्य से बेहतर मॉनसून का फायदा मिला था। लेकिन अब ENSO (El Niño-Southern Oscillation) पैटर्न बदल रहा है और FY27 में न्यूट्रल से अल-नीनो की ओर शिफ्ट देखने को मिल सकता है। यही बदलाव अगले मॉनसून सीजन के लिए सबसे बड़ी चिंता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय संचालन (NOAA) और दूसरे मौसम मॉडल यह दिखा रहे हैं कि आने वाले महीनों में अल-नीनो की संभावना बढ़ सकती है। शुरुआती चरण में मॉनसून पर इसका असर सीमित रह सकता है, लेकिन अगर यह पैटर्न मौसम के दौरान मजबूत हुआ, तो भारत में बारिश का वितरण बिगड़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे देश में एक जैसी सूखा जैसी स्थिति बनेगी, लेकिन कई हिस्सों में कमजोर बारिश, असमान बारिश और बुआई पर असर देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार एक बड़ा अंतर यह है कि पॉजिटिव IOD (इंडियन ओसेन डाइपोल) का मजबूत सहारा अभी साफ तौर पर डेवलप नहीं दिख रहा। बीते समय में कई बार IOD ने अल-नीनो के असर को कुछ हद तक संतुलित किया था, लेकिन FY27 के लिए ऐसी स्पष्ट राहत अभी नजर नहीं आ रही।
रिपोर्ट में पुराने अल-नीनो वर्षों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में ऐसे मौसम चक्र आमतौर पर कम बारिश और खेती पर दबाव के साथ जुड़े रहे हैं। हालांकि हर अल-नीनो साल सूखे में नहीं बदला, लेकिन खरीफ उत्पादन, ग्रामीण आय और कृषि आधारित मांग पर असर का पैटर्न बार-बार दिखा है।
अल-नीनो का प्रभाव सीधा और एक जैसा नहीं होता। कई बार मध्यम अल-नीनो ज्यादा नुकसान करता है, जबकि कभी मजबूत अल-नीनो का असर IOD या दूसरे फैक्टर्स से कम हो जाता है। फिर भी मौजूदा मॉडल यह इशारा दे रहे हैं कि FY27 में जोखिम को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा फोकस एग्री-इनपुट सेक्टर पर है। अगर मॉनसून कमजोर रहता है, तो खरीफ बुआई घट सकती है, जिसके कारण किसानों की ओर से कीटनाशक, फसल सुरक्षा उत्पाद और कुछ फर्टिलाइजर्स की मांग धीमी पड़ सकती है। इसका असर घरेलू एग्रोकेमिकल कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ पर दिख सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मॉनसून वाले सालों में एग्रोकेमिकल कंपनियों की बिक्री पर दबाव ज्यादा जल्दी आता है, क्योंकि किसान डिस्क्रेशनरी खरीद टाल देते हैं। चैनल इन्वेंट्री बढ़ने, डिस्काउंटिंग और क्रेडिट साइकिल लंबी होने से मार्जिन भी प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि घरेलू बाजार पर ज्यादा निर्भर कंपनियां ज्यादा संवेदनशील रह सकती हैं, जबकि एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियां अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकती हैं।
फर्टिलाइजर कंपनियों में भी असर एक जैसा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ रेगुलेटेड या कम जरूरी कैटेगरी की मांग ज्यादा स्थिर रह सकती है, लेकिन फॉस्फेटिक और क्रॉप-लिंक्ड कैटेगरीज पर दबाव संभव है। खासकर तब जब किसान आय और फसल की अनिश्चितता के बीच खरीद टालें।
रिपोर्ट में ग्रामीण खपत को लेकर भी सतर्क रुख अपनाया गया है। FY26 में ग्रामीण मांग धीरे-धीरे सुधरती दिखी थी, लेकिन FY27 में अगर कमजोर मॉनसून की स्थिति बनती है, तो यह रिकवरी फिर धीमी पड़ सकती है। इसका असर खासकर उन कंपनियों पर हो सकता है जिनकी बिक्री का बड़ा हिस्सा गांवों और छोटे कस्बों से आता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि FMCG, घरेलू उपभोग और कुछ कंज्यूमर कंपनियां शॉर्ट टर्म में दबाव महसूस कर सकती हैं, क्योंकि फसल उत्पादन कमजोर होने पर किसानों की आय और खरीद क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि असर सभी कैटेगरी में समान नहीं होगा। जरूरी सामानों की मांग अपेक्षाकृत टिकाऊ रह सकती है, लेकिन डिस्क्रेशनरी कैटेगरीज में दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के आधार पर FY27 अल-नीनो जोखिम को लेकर कुछ सेक्टर सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। जैसेकि, कृषि और खरीफ फसल चक्र से जुड़े सेक्टर संवेदनशील सेक्टर्स में है। ऐसा इसलिए क्योंकि बारिश की अनिश्चितता सीधे बुआई, पैदावार और फार्म इनकम को प्रभावित करती है। वहीं, घरेलू एग्रोकेमिकल कंपनियां भी हैं, जिनकी मांग किसानों के खर्च और सीजनल क्रॉप प्रोटेक्शन साइकल पर निर्भर करती है।
इसके अलावा, कुछ फर्टिलाइजर कंपनियां हैं, खासकर वे जिनकी बिक्री क्रॉप इकोनॉमिक्स और फॉर्म सेंटीमेंट से ज्यादा प्रभावित होती है। वहीं, FMCG और कंज्यूमर कंपनियां भी हैं, जहां डिमांड रिकवरी कमजोर पड़ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अल-नीनो का हर कंपनी पर असर समान नहीं होगा। जिन कंपनियों का बिजनेस मिक्स डायवर्सिफाइड है, जिनका एक्सपोर्ट एक्सपोजर ज्यादा है, या जिनका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो आवश्यक और कम क्रिटिकल है, वे अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकती हैं। इसी तरह कंज्यूमर सेक्टर में भी बड़े स्तर पर घबराहट की बजाय चुनिंदा असर देखने को मिल सकता है। यानी FY27 में हर रूरल कारोबार से जुड़े सभी सेक्टर और उनके शेयरों पर एक तरह का असर नहीं देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट का कहना है अगर FY27 में अल-नीनो की स्थिति सूखे में बदल जाती है, तो इसका भारतीय कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अलग-अलग की ओर से जताई गई संभावनाएं और उनके पिछले ट्रेंड के आधार पर अनुमान बताते हैं कि FY27 में इस घटना के होने की आशंका है।
भारतीय एग्रोकेमिकल और फर्टिलाइजर कंपनियों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि बुआई कम होने और फसल उत्पादन घटने से मांग में कमी आ सकती है। इसलिए, अल-नीनो के प्रभाव से इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश का अवसर हो सकता है।
Also Read | Liquor stocks: बाजार सुस्त, लेकिन शराब शेयर मस्त! अचानक क्यों आई इतनी तेजी?
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि एग्रोकेमिकल और फर्टिलाइजर सेक्टर PI इंडस्ट्रीज और कोरोमंडल इंटरनेशनल (CRIN) हमारी टॉप पसंद हैं और इनकी प्रदर्शन पर किसी भी नकारात्मक असर को इन कंपनियों में निवेश बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। फर्टिलाइजर सेक्टर CRIN पर ब्रोकरेज ने BUY रेटिंग है। वहीं एग्रोकेमिकल क्षेत्र में PI और गोदरेज एग्रोटेक (GOAGRO) पर BUY रेटिंग है, जबकि UPLL पर Neutra l रेटिंग है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, इसके अलावा, कंज्यूमर सेक्टर में ग्रामीण मांग धीरे-धीरे सुधर रही है, लेकिन FY27 में संभावित सूखा शॉर्ट टर्म में जोखिम पैदा कर सकता है, जिससे पूरे सेक्टर की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। इसके बावजूद, मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो और स्थिर प्रदर्शन के चलते ब्रिटानिया (BRIT) पर हमारी BUY रेटिंग है, और टाटा कंज्यूमर (TATACONS) और वरूण बेवरेजेज (VBL) पर भी BUY रेटिंग बरकरार है।
(डिस्क्लेमर: यहां शेयर में खरीदारी की सलाह ब्रोकरेज फर्म ने दी है। ये बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी के विचार नहीं हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइरज से परामर्श कर लें।)