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‘पोर्टेबल KYC से बदलेगा निवेश का अंदाज’, वित्त मंत्री ने SEBI को दिया डिजिटल क्रांति का नया मंत्र

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वित्त मंत्री ने SEBI से KYC प्रक्रिया को आसान और पोर्टेबल बनाने को कहा है। साथ ही उन्होंने साइबर सुरक्षा, AI के खतरों और निवेशकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया

Last Updated- April 25, 2026 | 5:23 PM IST
Nirmala Sitharaman
कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखतीं FM सीतारमण | फोटो: PTI

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर वित्तीय जगत को लेकर भविष्य का खाका पेश किया। उन्होंने SEBI से अपील की कि वह पूरे वित्तीय तंत्र में ‘नो योर कस्टमर’ यानी KYC की प्रक्रियाओं को आसान और एक समान (स्टैंडर्डाइज्ड) बनाने की दिशा में नेतृत्व करे।

वित्त मंत्री ने एक ऐसे सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर जोर दिया जिसमें KYC ‘पोर्टेबल’ हो, यानी अगर कोई नागरिक एक बार अपनी वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कर ले, तो उसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बार-बार वही प्रक्रिया न दोहरानी पड़े। इसके लिए उन्होंने वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) व अन्य नियामकों के साथ मिलकर तालमेल बिठाने को कहा है।

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का मंत्र

नियामकीय ढांचे पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब हमें ‘रिएक्टिव’ (घटना के बाद कदम उठाना) से ‘एंटीसिपेटरी’ (आने वाली चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाना) की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए होने वाले मार्केट एब्यूज, सीमा पार से होने वाली धोखाधड़ी और साइबर हमलों जैसे उभरते जोखिमों पर पैनी नजर रखने की हिदायत दी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम अब केवल निर्देशों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि वे सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए और किसी भी नए नियम को लाने से पहले जनता के साथ व्यापक सलाह-मशविरा जरूरी है।

Also Read: SEBI का नया प्रस्ताव: स्टॉक ब्रोकर्स के नेटवर्थ नियम बदलेंगे, क्या होगा असर?

साइबर सुरक्षा और कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट पर जोर

साइबर सुरक्षा को वित्त मंत्री ने पूंजी बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बाजार के बुनियादी ढांचे पर एक भी बड़ा साइबर हमला होता है, तो उसका असर पूरे सिस्टम पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने SEBI के 2025 के साइबर रेजिलिएंस फ्रेमवर्क की सराहना की, लेकिन साथ ही लगातार अपडेट रहने की सलाह दी क्योंकि एआई और डीपफेक जैसे खतरों के कारण हमले अब और ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं।

इसके अलावा, सीतारमण ने भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को और गहरा बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों की वकालत की। उन्होंने कहा कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने और बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) में सुधार लाने के लिए SEBI को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने क्रेडिट एनहांसमेंट मैकेनिज्म को मजबूत करने की भी बात कही ताकि उन छोटी कंपनियों को भी बॉन्ड मार्केट से फंड मिल सके जिनकी रेटिंग कम है लेकिन उनका बिजनेस मॉडल मजबूत है।

वित्त मंत्री ने शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नगर निगम बॉन्ड (Municipal Bonds) पर भी जोर दिया।

निवेशक सुरक्षा और वैश्विक तालमेल

निवेशकों की सुरक्षा के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाली अनियंत्रित सलाह और बिना जानकारी के निवेश करना जोखिम भरा है। इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने SEBI से क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता अभियान चलाने और शिकायतों के निपटारे के लिए तेज सिस्टम बनाने को कहा।

उन्होंने “SEBI चेक” जैसे टूल्स और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर जोर दिया ताकि धोखाधड़ी करने वाले बिचौलियों और पेमेंट स्कैम को रोका जा सके।

वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय नियामकों को अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ निरंतर संवाद में रहना चाहिए। सतत वित्त (Sustainable Finance) और एआई जैसे मुद्दों पर वैश्विक चर्चाओं में भाग लेने से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिना ईमानदारी के आकार और बिना सुशासन के विकास का कोई महत्व नहीं है। भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ऊर्जा बदलाव की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल बैंक बैलेंस शीट काफी नहीं है, इसके लिए एक गहरे और अच्छी तरह से विनियमित पूंजी बाजार का होना जरूरी है।

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First Published - April 25, 2026 | 5:23 PM IST

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