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FPI Data: विदेशी निवेशकों का भारत से मोहभंग! मई में भी शेयर बाजार से निकाले ₹14,231 करोड़

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वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगे कच्चे तेल और ब्याज दरों के दबाव के बीच मई में भी भारतीय बाजार से FPI की भारी बिकवाली जारी रही।

Last Updated- May 10, 2026 | 11:39 AM IST
FPI
Representative image

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की निकासी का सिलसिला मई में भी जारी है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में अब तक FPIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹14,231 करोड़ की निकासी की है। इसके साथ ही इस साल अब तक कुल विदेशी निकासी ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।

फरवरी को छोड़ हर महीने रही बिकवाली

साल 2026 में विदेशी निवेशक फरवरी को छोड़कर हर महीने भारतीय बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे हैं। जनवरी में FPIs ने ₹35,962 करोड़ निकाले थे। इसके बाद फरवरी में उन्होंने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था।

हालांकि, मार्च में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की। अप्रैल में भी यह दबाव जारी रहा, जब ₹60,847 करोड़ की निकासी दर्ज की गई। अब मई में भी बिकवाली का दौर जारी है।

वैश्विक अनिश्चितताओं का असर

मार्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल और मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। इनमें महंगाई को लेकर चिंता, ब्याज दरों का दबाव और भू-राजनीतिक जोखिम प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि इन कारणों से उभरते बाजारों को लेकर निवेशकों की धारणा कमजोर बनी हुई है, जिसका असर भारत समेत कई बाजारों पर देखने को मिल रहा है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना कई वैश्विक और घरेलू कारणों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया भर में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

ब्याज दरों और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञ हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक ब्याज दरों की दिशा को लेकर बनी अनिश्चितता विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बनी हुई है। उनके मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से निवेशक अब प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ओर से जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों का नए सिरे से आकलन कर रहे हैं।

विकसित देशों के बॉन्ड बने आकर्षक

हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार वैश्विक बॉन्ड यील्ड मजबूत बनी हुई है, जिससे विकसित देशों के फिक्स्ड इनकम एसेट्स निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं। इसका असर उभरते बाजारों की इक्विटी में निवेश पर पड़ रहा है और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रुपये पर समय-समय पर दबाव बने रहने से विदेशी निवेशकों के डॉलर आधारित रिटर्न प्रभावित हो रहे हैं, जो FPI निवेश के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

चुनिंदा सेक्टर्स में जारी है निवेश

वहीं, V K Vijayakumar ने कहा कि कुल मिलाकर बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक पावर, कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स सेक्टर में चुनिंदा निवेश कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब मिडकैप और कुछ मजबूत स्मॉलकैप शेयरों की ओर भी बढ़ रहा है। बेहतर ग्रोथ संभावनाओं और मजबूत आय प्रदर्शन वाली कंपनियां निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

वी के विजयकुमार के मुताबिक रुपये में कमजोरी और भारत में आय वृद्धि को लेकर चिंता इस साल FPI आउटफ्लो की बड़ी वजह रही है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनियों में बेहतर कमाई की उम्मीदें हैं। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों का रुझान इन बाजारों की ओर बढ़ रहा है।

-पीटीआई इनपुट के साथ

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First Published - May 10, 2026 | 11:39 AM IST

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