तेजी के आखिरी दौर में सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों को अब भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। हाल के हफ्तों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। कीमतों में मजबूत वृद्धि और हाल के आकर्षक रिटर्न के कारण 2025 के दौरान सोने और चांदी के ईटीएफ में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी थी। शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को अपेक्षाकृत इन विशिष्ट फंड श्रेणियों की ओर ज्यादा आकर्षित किया।
जनवरी में उनकी हिस्सेदारी चरम पर पहुंच गई। उस महीने सोने और चांदी के ईटीएफ में कुल निवेश रिकॉर्ड 33,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। नए खातों में भी भारी वृद्धि हुई, जो खुदरा निवेशकों की भागीदारी में उछाल का संकेत था। लगभग 28 लाख नए खाते जोड़े गए। विशेषज्ञों ने इसका श्रेय तब विविधीकरण और मोमेंटम आधारित निवेश के प्रति बढ़ती जागरूकता को दिया था।
लेकिन जल्द ही यह रुझान पलट गया। दोनों धातुओं की कीमतें फरवरी में गिरने लगीं। अमेरिका-ईरान की लड़ाई के बीच मार्च में यह गिरावट और भी गहरा गई। घरेलू सोने की कीमतें 29 जनवरी के उच्चतम स्तर से 20 फीसदी से अधिक नीचे आ गई हैं जबकि चांदी की कीमतों में इसी अवधि में लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि बढ़ती कीमतें मोमेंटम संचालित निवेश को आकर्षित करती हैं, लेकिन सोने और चांदी के ईटीएफ में हालिया उछाल को केवल रिटर्न के आधार पर नहीं समझाया जा सकता है।
आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के निदेशक थॉमस स्टीफन ने कहा, हालांकि इसका कुछ हिस्सा बाज़ार में आई उछाल के कारण हो सकता है, खासकर चांदी और सोने की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि को देखते हुए, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं हो सकता। यह ध्यान देने की बात है कि पिछले 18 महीनों में शेयर बाजार अपेक्षाकृत कमजोर रहे हैं और भू-राजनीतिक तनावों में वृद्धि ने घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं दोनों को प्रभावित किया है। उथल-पुथल के समय में सोना स्वाभाविक व सुरक्षित निवेश होता है और बचाव का काम करता है।
उन्होंने कहा, अगर कोई वास्तव में लंबी अवधि के लिए सोच रहा है और निवेशक विशुद्ध रूप से विविधीकरण के दृष्टिकोण से इन विकल्पों को देख रहा है तो इन कीमतों पर निवेश करना अभी भी ठीक है। आदर्श रूप से, दोनों धातुओं का संयुक्त निवेश आपके समग्र पोर्टफोलियो के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
वैलम कैपिटल के सीईओ और पोर्टफोलियो मैनेजर मनीष भंडारी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने पर विविधीकरण का रुझान फिर से बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा, मौजूदा गिरावट ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की आशंकाओं से प्रतीत होती है, जिससे मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और लंबे समय से प्रतीक्षित ब्याज दरों में कटौती में देर हो सकती है। इस वजह से सोने जैसी गैर-लाभकारी संपत्तियों को लेकर निकट भविष्य में उत्साह कम हो सकता है। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा संकट से अमेरिका प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभरता दिख रहा है, जो पूंजी को डॉलर संपत्तियों की ओर आकर्षित कर रहा है और सोने से दूर कर रहा है। लेकिन जब भू-राजनीतिक तनाव कम होगा और युद्ध से संबंधित जोखिम प्रीमियम घटेगा तो निवेशक दीर्घकालिक विविधीकरण पर फिर से ध्यान देंगे जिससे सोने का आकर्षण बढ़ सकता है।