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भारत-पाक तनाव से हिला शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी गिरे, इंडिया VIX में उछाल

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अमेरिकी नीतियों और सीमा पर सैन्य कार्रवाई से बढ़ी अनिश्चितता, एफपीआई निवेश बरकरार

Last Updated- May 08, 2025 | 11:26 PM IST
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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को बेंचमार्क सूचकांक- निफ्टी-50 और सेंसेक्स ढीले पड़ गए जबकि उतारचढ़ाव का पैमाना इंडिया विक्स उछल गया। सेंसेक्स 412 अंक यानी 0.1 फीसदी टूटकर 80,335 पर बंद हुआ और उसमें शामिल 23 शेयर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी-50 इंडेक्स 141 अंक यानी 0.6 फीसदी फिसलकर 24,274 पर टिका।

भारत ने गुरुवार को कहा कि उसने उत्तर और पश्चिम भारत में कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने की पाकिस्तानी सेना की कोशिशों को नाकाम कर दिया। जवाब में भारतीय सैन्य बलों ने पाकिस्तान के अंदर कई स्थानों पर एयर डिफेंस राडार और सिस्टम को निशाना बनाया। प्रमुख सेक्टरों में ऑटोमोबाइल, धातु, फार्मा और पीएसयू बैंकों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई और उनके सूचकांक करीब 2 फीसदी लुढ़क गए।

आईटी और मीडिया शेयर हरे निशान में बंद हुए। इंडिया विक्स 10 फीसदी चढ़कर 21.01 पर जा पहुंचा। यह 9 अप्रैल के बाद इसका सर्वोच्च स्तर है। यह संकेतक ऑप्शन ट्रेडिंग के रुख से चलता है। इंडेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी ने भी गुरुवार को उतारचढ़ाव में इजाफा किया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा, इंडिया वीआईएक्स में तेज वृद्धि बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण आई जो आमतौर पर इंडेक्स की साप्ताहिक एक्सपायरी से जुड़ी अस्थिरता से और बढ़ गई। यह उछाल निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

व्यापक बाजार में गिरावट और ज्यादा रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.95 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.4 फीसदी टूटा। इस तरह से उसने पिछले सत्र में दर्ज ज्यादातर बढ़त गंवा दी। बढ़ते तनाव का असर रुपये पर भी पड़ा और यह डॉलर के मुकाबले 89 पैसे टूटकर 85.71 पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत-पाक के बीच तनाव और व्यापार के मोर्चे पर अमेरिका के कदम आने वाले समय में बाजार को दिशा देना जारी रखेंगे। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, बाजार में अस्थिरता जारी रहने की संभावना है क्योंकि निवेशक भारत-पाकिस्तान के मामले पर आगे की गतिविधियों और अमेरिकी व्यापार घोषणाओं पर नजर रखेंगे।

मुद्रास्फीति पर अमेरिकी फेड की टिप्पणी और ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के उसके फैसले ने भी निवेशकों की धारणा प्रभावित की। अमेरिकी फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उच्चस्तर की अनिश्चितता और आयात पर ऊंचे टैरिफ के कारण मुद्रास्फीति के जोखिम के चलते उन्हें ब्याज दरों में कटौती की कोई जल्दी नहीं है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच जल्द ही व्यापार समझौते की उम्मीदों तथा चीन के साथ व्यापार वार्ता के प्रारंभिक संकेतों से वैश्विक बाजार स्थिर व सकारात्मक बना हुआ है।
बाजार और रुपये में गिरावट के बावजूद घरेलू इक्विटी में विदेशी निवेशकों का मजबूत निवेश जारी रहा। गुरुवार को एफपीआई ने 2,008 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे जो उनकी लगातार 16वें सत्र में खरीदारी थी। 15 अप्रैल से अब तक उन्होंने भारतीय इक्विटी में करीब 50,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह जून-जुलाई 2023 के बाद एफपीआई निवेश का सबसे सबसे लंबा सिलसिला भी है।

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First Published - May 8, 2025 | 11:26 PM IST

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