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IT कंपनियों ने निवेशकों पर लुटाया प्यार! AI के खतरों के बीच FY26 में दिया ₹1.3 लाख करोड़ का डिविडेंड और बायबैक

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यह वित्त वर्ष 2025 के कुल 95,400 करोड़ रुपये के भुगतान से 36.3 फीसदी अधिक है। पिछले 9 साल में आईटी उद्योग द्वारा शेयरधारकों को किए गए भुगतान में यह सबसे तेज वृद्धि है

Last Updated- May 12, 2026 | 11:22 PM IST
Dividend Stocks
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आर्टिफिशल इटेलिजेंस (एआई) के विकास से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग के पारंपरिक कारोबार को भले ही खतरा दिख रहा हो मगर भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों ने अपने शेयरधारकों को ज्यादा भुगतान करने का फैसला किया है। देश की शीर्ष 16 सूचीबद्ध आईटी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने शेयरधारकों को करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये के लाभांश देने और शेयर पुनर्खरीद की घोषणा की है, जो अब तक का सर्वा​धिक आंकड़ा है।

यह वित्त वर्ष 2025 के कुल 95,400 करोड़ रुपये के भुगतान से 36.3 फीसदी अधिक है। पिछले 9 साल में आईटी उद्योग द्वारा शेयरधारकों को किए गए भुगतान में यह सबसे तेज वृद्धि है।

वित्त वर्ष 2025 में शेयरधारकों को मिलने वाले भुगतान में 10.6 फीसदी की गिरावट आई थी क्योंकि आय और मुनाफा वृद्धि में नरमी को देखते हुए कंपनियों ने शेयरधारकों को भुगतान करने के बजाय मुनाफे का ज्यादा हिस्सा अपने पास रखने को प्राथमिकता दी थी।

दूसरी ओर वित्त वर्ष 2026 में इन 16 कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा महज 3.5 फीसदी बढ़ा जो बीते 8 साल में सबसे धीमी वृद्धि है। इस दौरान उनकी कुल 

आय या शुद्ध बिक्री 7.6 फीसदी बढ़ी जबकि वित्त वर्ष 2025 में इसमें 5.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। वित्त वर्ष 2026 में इन कंपनियों का कर बाद कुल मुनाफा करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये रहा और उनकी शुद्ध आय करीब 8.28 लाख करोड़ रुपये रही।

शेयरधारकों को किए गए भुगतान में यह वृद्धि मुख्य रूप से इन्फोसिस और विप्रो द्वारा की गई रिकॉर्ड शेयर पुनर्खरीद की वजह से हुई है। इन्फोसिस ने नवंबर में 18,000 करोड़ रुपये की अपनी अब तक की सबसे बड़ी शेयर पुनर्खरीद पूरी की जबकि विप्रो ने 15,000 करोड़ रुपये की पुनर्खरीद की घोषणा की है। छोटी कंपनियों में साएंट ने भी 720 करोड़ रुपये की अपनी सबसे बड़ी शेयर पुनर्खरीद की घोषणा की है।

कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2026 में आईटी उद्योग ने पुनर्खरीद पर 33,895 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की जो वित्त वर्ष 2024 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा पुनर्खरीद का आंकड़ा है। वित्त वर्ष 2024 में आईटी कंपनियों ने पुनर्खरीद पर 38,300 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2026 में इक्विटी लाभांश भुगतान केवल 0.7 फीसदी बढ़कर 96,102 करोड़ रुपये रहा गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 95,401 करोड़ रुपये था।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ऐतिहासिक रूप से इस उद्योग में सबसे अ​धिक लाभांश देने वाली कंपनी रही है। लेकिन वित्त वर्ष 2026 में उसने अपने लाभांश भुगतान में 12.7 फीसदी की कटौती की है क्योंकि वह डेटा सेंटर और एआई कारोबार में निवेश करने की योजना बना रही है। 

वित्त वर्ष 2026 के लिए टीसीएस का कुल लाभांश भुगतान वित्त वर्ष 2025 के 45,612 करोड़ रुपये से घटकर 38,820 करोड़ रुपये रह गया। टीसीएस ने पिछले दो वित्त वर्ष में कोई शेयर पुनर्खरीद नहीं किया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 16 कंपनियों का भुगतान अनुपात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 102.2 फीसदी (कुल शुद्ध मुनाफे का) रहा जो वित्त वर्ष 2025 में 77.7 फीसदी था। लाभ और भुगतान का अनुपात वित्त वर्ष 2024 में 93.9 फीसदी था। लेकिन वित्त वर्ष 2026 में उद्योग ने शेयरधारकों को ज्यादा भुगतान करने का निर्णय किया। विश्लेषकों का कहना है कि कुछ आईटी कंपनियों के शेयर भाव और बाजार पूंजीकरण में गिरावट के कारण ऐसा हुआ है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और सीईओ जी चोकालिंगम ने कहा, ‘आईटी उद्योग की वृद्धि में निरंतर बाधाओं के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में शेयरधारकों को भुगतान में तेज वृद्धि असल में कंपनियों की शेयर कीमतों में गिरावट के कारण बाजार पूंजीकरण में कमी को देखते हुए शेयरधारकों को प्रोत्साहित करने की रणनीति से प्रेरित लगती है।’

बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 16 आईटी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण वित्त वर्ष 2026 में 25.3 फीसदी घटा है जो एक दशक से अधिक समय में उनका सबसे खराब वार्षिक प्रदर्शन है। मार्च 2025 के अंत में इनका कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 32.2 लाख करोड़ रुपये था जो घटकर मार्च 2026 में करीब 24 लाख करोड़ रुपये रह गया। 

पिछले हफ्ते आईटी क्षेत्र के शेयरों में और बिकवाली हुई तथा आज की गिरावट के बाद नमूने में शामिल 16 शेयरों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 23.21 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह मार्च 2022 के अंत में रिकॉर्ड 32.95 लाख करोड़ रुपये बाजार पूंजीकरण से लगभग 29.5 फीसदी कम है। शेयर बाजार में आईटी कंपनियों का लगातार कमजोर खराब प्रदर्शन बताता है कि शेयरधारकों को भुगतान में वृद्धि का कंपनियों के शेयर मूल्य पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

विश्लेषकों का मानना ​​है कि एआई के कारण आय में नरमी और एआई सहित नई तकनीकों में निवेश करने में भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की अनिच्छा इसका कारण है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के विश्लेषकों का कहना है, ‘कुल तकनीकी खर्च में तेजी से वृद्धि के बावजूद एआई खर्च आईटी सेवा खर्चों को प्रभावित कर रहा है।’

चोकालिंगम के अनुसार शेयरधारकों के भुगतान में तेज वृद्धि और 100 फीसदी से अधिक भुगतान अनुपात यह बताता है कि कंपनियां और उनके प्रवर्तक नई तकनीक में निवेश को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उनका कहना है, ‘इससे भारतीय आईटी सेवा उद्योग की दीर्घकालिक विकास क्षमता में निवेशकों का भरोसा बहाल नहीं होगा।’

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First Published - May 12, 2026 | 10:29 PM IST

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