भारतीय शेयरों में शुक्रवार को साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई और रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया। तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार के मनोबल पर दबाव डाला। एआई की वजह से कमाई में होने वाली संभावित बाधाओं को लेकर नई चिंताओं के कारण आईटी शेयरों में गिरावट आई। पश्चिम एशिया में एक जहाज पर हमले और दूसरे जहाज को जब्त किए जाने की घटना से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। इसके बाद ब्रेंट क्रूड 3.4 फीसदी चढ़कर 109.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
शुक्रवार को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इस हफ्ते इसमें 1.5 फीसदी की गिरावट आई। 2026 में अब तक विदेशी निवेश की निकासी रिकॉर्ड 23.63 अरब डॉलर रही है।
उधर, निफ्टी-50 सूचकांक 0.19 फीसदी गिरकर 23,643.50 पर आ गया। सेंसेक्स 0.21 फीसदी की गिरावट के साथ 75,237.99 पर पहुंच गया। इस हफ्ते दोनों में क्रमशः 2.2 फीसदी और 2.7 फीसदी की गिरावट आई। लिहाजा, पिछले दो हफ्तों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट गया।
16 प्रमुख सेक्टरों में से 13 में इस हफ्ते गिरावट दर्ज की गई। स्मॉल-कैप और मिड-कैप इंडेक्स में क्रमशः 4.6 फीसदी और 2.2 फीसदी की गिरावट आई। शुक्रवार को आईटी सूचकांक में 1.3 फीसदी की बढ़त हुई। लेकिन इससे हफ्ते भर में हुई 5.7 फीसदी की गिरावट की भरपाई बहुत ज्यादा नहीं हो पाई। इसकी वजह यह थी कि ओपनएआई ने 4 अरब डॉलर के निवेश से एक नया एआई वेंचर लॉन्च किया, जिससे आईटी कंपनियों के लिए राजस्व से जुड़े जोखिमों की चिंता बढ़ गई।
अमेरिका में अनुमान से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने भी इस सेक्टर पर दबाव डाला है। ऐसे में इस साल ब्याज दरों में इजाफे की संभावना बढ़ गई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने, रुपया कमजोर होने और ईंधन की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी से महंगाई की चिंताएं फिर से उभर आई हैं। इस कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अनुकूल मूल्यांकन और तिमाही नतीजों के मजबूत सीजन ने गिरावट को सीमित रखा है।
इस हफ़्ते अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 8.4 फीसदी की तेजी आई। इसकी वजह उबर की यह घोषणा रही कि वह इस समूह के साथ मिलकर भारत में अपना पहला डेटा सेंटर बनाएगी। गुरुवार को आई खबरों के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग कंपनी के संस्थापक गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप हटाने पर विचार कर रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा। ओएनजीसी के शेयरों में 7.2 फीसदी की बढ़त हुई। इसकी वजगह सरकार का कच्चे तेल और गैस उत्पादन पर रॉयल्टी घटाना रहा।
तिमाही मुनाफे में कमी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद ज्वैलरी शेयरों में गिरावट आने से टाइटन 7.5 फीसदी फिसल गया। बीपीसीएल, एचपीसीएल और इंडियन ऑयल को 2.9 फीसदी से लेकर 4.2 फीसदी के बीच नुकसान हुआ और ब्रेंट की ज्यादा कीमतों का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 फीसदी के इजाफे पर भारी पड़ गया।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल के शेयर नए वाहनों की पेशकश, लागत में कटौती के उपायों और बिक्री के मजबूत अनुमानों को लेकर बनी उम्मीदों के कारण 5.3 फीसदी चढ़ गए।